अब तक कई जगहों पर यह शिकायत सामने आती रही थी कि खाद खरीदने आए किसानों को जबरन कीटनाशक, दवाइयां या अन्य उत्पाद भी लेने पड़ते थे, जिससे उनकी लागत बेवजह बढ़ जाती थी। सरकार के इस निर्णय से न सिर्फ किसानों का आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
शासन ने उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र में दर्ज सभी गैर-अनुदानित उत्पादों की आपूर्ति और बिक्री को प्रतिबंधित करने की स्वीकृति दे दी है। इसका सीधा मतलब यह है कि उर्वरक विक्रेता अब केवल वही उत्पाद बेच सकेंगे, जिनकी अनुमति नियमों के तहत दी गई है। इससे कालाबाजारी और मनमानी पर भी अंकुश लगेगा।
इसके साथ ही सरकार ने कृषि क्षेत्र की क्षमता और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए 383 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। इस राशि का उपयोग कृषि परियोजनाओं के अनुरक्षण, कृषि विभाग के कार्यालयों को अधिक सशक्त बनाने, तथा कंप्यूटर और अन्य आवश्यक हार्डवेयर की खरीद में किया जाएगा। इससे विभागीय कामकाज आधुनिक होगा और किसानों को सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेंगी।
योगी सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भी बड़ा निवेश किया है। इस योजना के अंतर्गत कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 1098.02 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस धनराशि से प्रदेश में नई कृषि परिसंपत्तियों और अवस्थापनाओं का निर्माण किया जाएगा, जिससे किसानों को आधुनिक संसाधनों और सुविधाओं का सीधा लाभ मिलेगा।
यह फैसला किसानों की समस्याओं को समझते हुए लिया गया एक सकारात्मक कदम है। टैगिंग पर रोक और कृषि क्षेत्र में निवेश से न सिर्फ किसानों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि प्रदेश की कृषि व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। योगी सरकार का यह निर्णय किसान हितैषी नीतियों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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