दुर्घटनाओं और नुकसान ने बढ़ाई चिंता
हाल के महीनों में सामने आई कई सड़क दुर्घटनाओं ने इस मुद्दे को गंभीर बना दिया है। तेज़ डिलीवरी टाइमलाइन के कारण डिलीवरी एजेंट अक्सर जोखिम भरे तरीके से वाहन चलाने को मजबूर होते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि न सिर्फ हादसे बढ़ते हैं, बल्कि कई युवा कामगारों को शारीरिक और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि कोई भी सुविधा इंसानी जान से बड़ी नहीं हो सकती।
सरकार और कंपनियों के बीच बातचीत
केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों ने इस मामले में क्विक कॉमर्स कंपनियों के अधिकारियों से सीधी बातचीत की। श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इस मुद्दे पर कंपनियों के साथ चर्चा करते हुए गिग वर्कर्स की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। बातचीत के बाद ब्लिंकिट ने सरकार को आश्वासन दिया है कि वह अपने प्लेटफॉर्म से 10 मिनट डिलीवरी जैसे विज्ञापन पूरी तरह हटा देगा। उम्मीद की जा रही है कि अन्य कंपनियां भी इसी दिशा में कदम उठाएंगी।
संसद में भी उठा मामला
यह विषय संसद तक भी पहुंच चुका है। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्डा ने शीतकालीन सत्र में इस पर सवाल उठाते हुए कहा था कि तेज़ डिलीवरी की कीमत गिग वर्कर्स अपनी जान देकर चुका रहे हैं। उन्होंने सदन से आग्रह किया कि सुविधा से आगे बढ़कर इसके मानवीय पहलू पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।
गिग वर्कर्स के लिए सुरक्षा
सरकार का यह कदम गिग वर्कर्स को ज्यादा सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण देने की दिशा में देखा जा रहा है। इसके साथ ही गिग वर्कर्स के लिए कई व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं—
आधार कार्ड अनिवार्य: पंजीकरण के लिए आधार नंबर जरूरी
न्यूनतम उम्र: कम से कम 16 वर्ष
डिजिटल आईडी कार्ड: फोटो और पूरी जानकारी के साथ
यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN): डेटा साझा होने के बाद प्रदान किया जाएगा
जानकारी अपडेट करना जरूरी: मोबाइल, पता या स्किल बदलने पर अपडेट न करने से लाभ रुक सकता है।
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