सरकार ने किया बजट का प्रावधान
इस योजना के लिए राज्य सरकार ने कुल तीन करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसमें से एक करोड़ रुपये की राशि तत्काल आवंटित भी कर दी गई है। उद्योग विभाग ने इस योजना को लागू करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। बहुत जल्द पात्र बुनकरों के बैंक खातों में यह राशि भेजी जाएगी, जिससे उन्हें शुरुआती काम के लिए सीधी मदद मिल सके।
संकट में है बुनकरों का जीवन
फिलहाल बिहार में लगभग एक लाख बुनकर हैं, जिनमें से 70 से 75 हजार ही सक्रिय माने जाते हैं। इनमें भी निबंधित बुनकरों की संख्या करीब सात हजार है। आर्थिक तंगी के कारण बड़ी संख्या में बुनकरों का काम ठप हो गया है और कई लोग मजबूरी में इस पारंपरिक पेशे को छोड़ चुके हैं। इससे उनकी आजीविका और सामाजिक स्थिति दोनों प्रभावित हो रही है।
निबंधित बुनकरों को सीधा लाभ
सरकार इस योजना का लाभ पहले चरण में निबंधित बुनकरों को देगी। जिला उद्योग केंद्रों के माध्यम से पात्र बुनकरों की सूची तैयार की जा रही है, जिसमें उनके नाम और बैंक खाते का विवरण शामिल होगा। यह पूरी जानकारी हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय को भेजी जाएगी, ताकि सहायता राशि सीधे खातों में भेजी जा सके।
पहले ही हो चुकी है व्यापक जांच
पटना, भागलपुर, गया, मधुबनी समेत कई जिलों में पहले ही बुनकरों की स्थिति की जांच कराई जा चुकी है। हाल ही में उद्योग विभाग स्तर पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह निष्कर्ष निकला कि बुनकरों को आर्थिक सहायता देना अब अनिवार्य हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस विषय पर स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं।
बिहार सरकार का क्या है उद्देश्य?
उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि सरकार बुनकरों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना चाहती है। उनका कहना है कि इस विशेष सहायता से बुनकर बेहतर ढंग से काम कर सकेंगे और पारंपरिक उद्योग को नया जीवन मिलेगा।
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