शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतर
रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि बेरोजगारी की समस्या शहरों में अधिक गंभीर बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 3.9 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह बढ़कर 6.7 प्रतिशत हो गई, जो पिछले महीने 6.5 प्रतिशत थी। खासतौर पर शहरी युवा और पुरुषों में रोजगार की तलाश बढ़ रही है। हालांकि, शहरी महिलाओं के लिए थोड़ी राहत की खबर है, क्योंकि उनकी बेरोजगारी दर 9.3 प्रतिशत से घटकर 9.1 प्रतिशत हो गई।
कार्यशील जनसंख्या में हल्की बढ़त
देश में कुल कार्यशील जनसंख्या अनुपात (WPR) भी दिसंबर में 53.2 प्रतिशत से बढ़कर 53.4 प्रतिशत पर पहुँच गया। ग्रामीण पुरुषों का WPR 76 प्रतिशत हो गया, जबकि शहरी पुरुषों का WPR 70.4 प्रतिशत पर गिर गया। ग्रामीण महिलाओं का WPR 38.6 प्रतिशत पर पहुँच गया, और शहरी महिलाओं का WPR लगभग 23 प्रतिशत पर स्थिर रहा।
श्रम बल भागीदारी दर में बदलाव
कुल श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) भी हल्की बढ़त दिखाती है। यह दिसंबर में 55.8 प्रतिशत से बढ़कर 56.1 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में LFPR 58.6 प्रतिशत से बढ़कर 59 प्रतिशत रही, लेकिन शहरी क्षेत्रों में यह 50.4 प्रतिशत से घटकर 50.2 प्रतिशत हो गई। महिलाओं की LFPR 35.3 प्रतिशत पर पहुँच गई, जिसमें ग्रामीण महिलाओं का योगदान बढ़कर 40.1 प्रतिशत और शहरी महिलाओं का योगदान 25.3 प्रतिशत दर्ज किया गया।
नए सर्वेक्षण पद्धति का प्रभाव
PLFS के आंकड़े 3,73,990 लोगों के सर्वेक्षण पर आधारित हैं। जनवरी 2025 से लागू नई गणना पद्धति के चलते श्रम बाजार से जुड़े संकेतक अब पहले से अधिक व्यापक और सटीक मापने योग्य हैं। इससे न केवल बेरोजगारी की वास्तविक स्थिति का अंदाजा मिलता है, बल्कि नीति निर्माताओं को रोजगार सृजन के लिए भी बेहतर दिशा मिलती है।

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