बिहार में शिक्षकों के लिए एक बड़ा अपडेट, पढ़ें पूरी डिटेल

पटना। बिहार में स्कूल शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा अपडेट आया है। राज्य शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब बीपीएससी के रिजल्ट और मेरिट लिस्ट हेडमास्टरों को प्रभारी प्राचार्य या हेडमास्टर बनाने में प्राथमिक आधार होगी। यह कदम उन रिक्त पदों को भरने और स्कूलों में सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिनमें प्रारंभिक से लेकर प्लस टू स्कूलों तक कई पद खाली हैं।

कौन बन सकता है प्रभारी हेडमास्टर

शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रभारी बनाने में वरीयता का आधार सेवा अवधि और पेशेवर योग्यता होगी। उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अगर प्रधानाध्यापक का पद रिक्त है, तो विशिष्ट शिक्षक या बीपीएससी से नियुक्त शिक्षक जो पहले प्रशिक्षित और नियोजित शिक्षक रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। सेवा अवधि की गणना में स्थानीय निकाय प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में काम किए गए वर्षों को भी शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा, प्रभारी बनने के लिए बीएड और डीएलएड की अनिवार्यता लागू होगी। प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में प्रभारी बनने के लिए आवश्यक योग्यता क्रमशः दो वर्षीय डीएलएड और बीएड होगी। उच्च माध्यमिक स्कूलों में प्रमंडलीय संवर्ग के शिक्षकों को वरीयता दी जाएगी।

बीपीएससी हेडमास्टरों का प्रमंडल और जिला आवंटन

राज्य में कुल 896 बीपीएससी हेडमास्टरों का प्रमंडल और जिला आवंटन किया जा चुका है। यह आवंटन दो चरणों में हुआ। पहले चरण में जून 2025 में हेडमास्टरों को प्रमंडल और जिला दिए गए थे। जिन शिक्षकों ने पहले अपनी पसंद के प्रमंडल और जिले का योगदान नहीं दिया था, उनसे दोबारा विकल्प मांगे गए। मेरिट के आधार पर इन्हें अब उनके विकल्पों के अनुरूप प्रमंडल और जिला आवंटित किया गया है।

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया सेवा अवधि और गाइडलाइन

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सेवा अवधि की गणना शिक्षकों की पिछली सेवाओं के आधार पर की जाएगी। ऐसे शिक्षक जिन्होंने पहले किसी अन्य वर्ग या स्कूल में प्रशिक्षित और नियोजित शिक्षक के रूप में काम किया है, उनके वर्षों को भी माना जाएगा। लेकिन जिन शिक्षकों की पिछली सेवा अन्य श्रेणी में रही है, उन्हें यह लाभ नहीं मिलेगा।

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