शिक्षा विभाग द्वारा तैयार कार्य योजना के अनुसार, प्रत्येक शिक्षक को साल में दो बार 50-50 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण प्रोजेक्ट आधारित होगा, जिससे कक्षा शिक्षण में व्यावहारिकता और रचनात्मकता को बढ़ावा मिलेगा। विभाग का मानना है कि अब जब विद्यालयों में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता हो चुकी है, तो अगला फोकस शिक्षा की गुणवत्ता पर होना चाहिए।
छात्र-शिक्षक अनुपात में ऐतिहासिक सुधार
बीते दो दशकों में बिहार के छात्र-शिक्षक अनुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2005 में जहां एक शिक्षक पर औसतन 65 छात्र हुआ करते थे, वहीं वर्ष 2026 तक यह अनुपात घटकर 29 छात्र प्रति शिक्षक हो गया है। इसे शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। आने वाले समय में नई नियुक्तियों के बाद यह अनुपात और बेहतर होने की संभावना है।
प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग और नई शिक्षण पद्धति
नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सरकारी विद्यालयों में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग को लागू किया जाएगा। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को अध्ययन सामग्री तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही, सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) को प्रशिक्षण की तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
टेक्नोलॉजी, एआई और साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि शिक्षकों को अब आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इसी क्रम में शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर सुरक्षा और डिजिटल स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह ट्रेनिंग नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप होगी और सरकारी के साथ-साथ निजी एवं अनुदान प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों के लिए भी अनिवार्य होगी।
बता दें की यह ऑनलाइन प्रशिक्षण दीक्षा पोर्टल के माध्यम से सतत व्यावसायिक विकास (सीपीडी) कार्यक्रम के तहत कराया जाएगा। इसमें डिजिटल साक्षरता, टेक्नो-पेडागॉजी, मीडिया लिटरेसी, डेटा प्राइवेसी, वित्तीय सुरक्षा, रोबोटिक्स और ड्रोन जैसे विषय शामिल होंगे। प्रशिक्षण पूरा करने और अंतिम परीक्षा उत्तीर्ण करने पर शिक्षकों को डिजिटल प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।
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