शेयर बाजार पर दिख रहा है दबाव
पिछले एक महीने से भारतीय शेयर बाजार में सुस्ती साफ नजर आ रही है। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही सीमित दायरे में घूमते दिख रहे हैं। न तो तेज उछाल है और न ही कोई ठोस गिरावट, बल्कि एक तरह की ठंडक बनी हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और खासतौर पर अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर असमंजस मानी जा रही है।
ट्रंप की धमकियों से निवेशक मायूस
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की अनिश्चित और आक्रामक बयानबाजी निवेशकों को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है। एक ओर एशियाई बाजारों में मजबूती दिखी, वहीं भारतीय बाजार लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स सैकड़ों अंकों तक फिसला और निफ्टी भी नुकसान में रहा।
दरअसल, ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर नाराजगी जताते हुए यह संकेत दिया कि भारतीय उत्पादों पर टैरिफ और बढ़ाए जा सकते हैं। हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत तारीफ भी की, लेकिन साथ ही यह साफ कर दिया कि व्यापार के मुद्दे पर वह सख्ती बरत सकते हैं। यही विरोधाभासी रवैया बाजार को असहज कर रहा है।
अमेरिका से ट्रेड डील क्यों है इतनी जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के दीर्घकालिक आर्थिक प्रदर्शन के लिए अमेरिका के साथ एक स्थिर और स्पष्ट व्यापार समझौता बेहद जरूरी है। बाजार को उम्मीद थी कि टैरिफ दरें मौजूदा ऊंचे स्तर से घटेंगी और फिर एक व्यापक समझौते पर मुहर लगेगी। लेकिन बार-बार बदलते सुर और नकारात्मक टिप्पणियों ने इन उम्मीदों को कमजोर कर दिया है।
हालांकि अभी तक भारत के निर्यात पर कोई बड़ा झटका नहीं लगा है। भारतीय उत्पादों और सेवाओं की वैश्विक मांग बनी हुई है, जिससे स्थिति संभली हुई है। लेकिन अगर यह अनिश्चितता लंबे समय तक जारी रही, तो आने वाले समय में निर्यात पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
.png)
0 comments:
Post a Comment