सीएम योगी का आदेश, सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि राज्य के सभी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी अब अनिवार्य रूप से सात दिन का क्षमता-विकास प्रशिक्षण पूरा करेंगे। खास बात यह है कि इस प्रशिक्षण को आगे चलकर पदोन्नति और वार्षिक मूल्यांकन से जोड़ा जा सकता है, जिससे कर्मचारियों की जिम्मेदारी और कार्यक्षमता दोनों बढ़ेंगी।

मिशन कर्मयोगी को मिलेगी नई तेज गति

मुख्यमंत्री ने यह निर्देश मिशन कर्मयोगी की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं में कार्यरत मानव संसाधन को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। इस मिशन के तहत कर्मचारियों के ज्ञान, कौशल और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि शासन अधिक संवेदनशील और परिणाम देने वाला बन सके।

iGOT प्लेटफॉर्म बना प्रशिक्षण का आधार

सरकार द्वारा विकसित iGOT डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश और प्रदेश के लाखों कर्मचारी ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इस मंच पर हजारों कोर्स उपलब्ध हैं, जिन्हें हिंदी सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार किया गया है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकारी तंत्र में सीखने की संस्कृति मजबूत हो रही है।

तकनीक आधारित प्रशिक्षण पर फोकस

मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे अपनी जरूरतों के अनुसार नए प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करें। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और आधुनिक तकनीकों को प्रशिक्षण का अहम हिस्सा बनाने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि कर्मचारी बदलते डिजिटल माहौल में प्रभावी ढंग से काम कर सकें।

जमीनी स्तर के कर्मियों को प्राथमिकता

सीएम योगी ने कहा कि मिशन कर्मयोगी का लाभ केवल उच्च अधिकारियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। आशा कार्यकर्ता, एएनएम, पुलिस बल, पंचायत और नगर निकायों के फील्ड कर्मचारी जैसे जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों को प्राथमिकता देते हुए उनके लिए व्यावहारिक और कार्य-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएं।

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