Su-30MKI पर नई तकनीक का परीक्षण
वर्तमान में DRDO, Su-30MKI जैसे फ्रंटलाइन फाइटर जेट पर मिसाइल इंटीग्रेशन का काम संभाल रहा है। Su-30MKI भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक और एयर डॉमिनेंस क्षमता की रीढ़ है। भविष्य में आने वाली नई और एडवांस मिसाइलों को आसानी से जोड़ने के लिए DRDO एक नया एम्बेडेड इंटरफेस सिस्टम विकसित कर रहा है। यह सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी SoC2 Mk-II चिप पर आधारित होगा, जिसे हैदराबाद स्थित RCI (Research Centre Imarat) ने डिजाइन और विकसित किया है।
आधुनिक मिसाइलों के लिए खास तकनीकी
आज की एयर-लॉन्च्ड मिसाइलें केवल विमान पर लटकाने और दागने तक सीमित नहीं हैं। इन्हें विमान के रडार, मिशन कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और सेंसर फ्यूजन के साथ गहरे डिजिटल तालमेल की जरूरत होती है। इसीलिए DRDO का नया एम्बेडेड सिस्टम एक रियल-टाइम डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करेगा, जो विमान और मिसाइल के बीच तेज और सुरक्षित डेटा एक्सचेंज सुनिश्चित करेगा।
DRDO की SoC2 Mk-II चिप की खासियत
मिलिट्री-ग्रेड और रेडिएशन-प्रोटेक्टेड: वायुसेना की सख्त सुरक्षा मानकों के अनुरूप
हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर: एयरोस्पेस और मिसाइल सिस्टम्स के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया
स्वदेशी नियंत्रण और एन्क्रिप्शन: सॉफ्टवेयर और कंट्रोल सिस्टम पर पूरी पकड़
इस चिप के जरिए DRDO को मिसाइल इंटीग्रेशन के हर चरण पर पूर्ण नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
डिजिटल इंटीग्रेशन का भविष्य
इस नए एम्बेडेड सिस्टम के तैयार होने के बाद, यही भविष्य की सभी एयर-लॉन्च्ड मिसाइलों का डिजिटल आधार बनेगा। ग्राउंड लेवल पर सॉफ्टवेयर विकास और टेस्टिंग पहले होंगे, सॉफ्टवेयर टारगेट डेटा, गाइडेंस अपडेट, मिसाइल की जानकारी, आर्मिंग और लॉन्च जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करेगा। भविष्य में सभी नई मिसाइलों का इंटीग्रेशन इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आसान और सुरक्षित होगा

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