भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट जल्द, मोदी सरकार का प्लान तैयार

नई दिल्ली। वैश्विक व्यापार परिदृश्य में तेजी से बदलाव के बीच भारत के लिए नए अवसर खुलते नजर आ रहे हैं। अमेरिका द्वारा कई उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने अपनी व्यापारिक रणनीति को और व्यापक बनाया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि भारत अब अमेरिका के अलावा अन्य बाजारों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है। इसी दिशा में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) भारत की सबसे अहम कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति बनकर उभरा है।

भारत पहले ही कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर चुका है, जिससे भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिली है। हाल ही में न्यूजीलैंड के साथ FTA को अंतिम रूप दिया गया और अब 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ समझौते की तैयारी अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है।

एफटीए को अंतिम रूप देने की तैयारी

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल जनवरी 2026 में दो दिवसीय दौरे पर ब्रुसेल्स जाएंगे। इस यात्रा को भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौते के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। यह दौरा न केवल व्यापारिक वार्ताओं को गति देगा, बल्कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को भी दर्शाता है। इस दौरान पीयूष गोयल यूरोपीय संघ के व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविच से उच्च स्तरीय बातचीत करेंगे।

नौ साल बाद फिर शुरू हुई वार्ता

भारत–ईयू एफटीए बातचीत एक लंबे अंतराल के बाद जून 2022 में दोबारा शुरू हुई थी। इसके बाद से अब तक दोनों पक्षों के बीच 14 दौर की गहन बातचीत हो चुकी है। मंत्री स्तर पर भी कई अहम बैठकें हुई हैं, जिनमें हालिया संवाद दिसंबर 2025 में हुआ था। यह दर्शाता है कि दोनों पक्ष इस समझौते को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध हैं।

व्यापार से आगे की साझेदारी

यह समझौता केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है। भारत और यूरोपीय संघ इसे एक व्यापक आर्थिक साझेदारी के रूप में देख रहे हैं, जिसमें निवेश, तकनीक, सप्लाई चेन और नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था शामिल है। यूरोपीय संघ पहले से ही भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और प्रमुख निवेशक है। बीते वित्त वर्ष में दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

किसानों और MSME को लाभ

सरकार का जोर इस बात पर है कि एफटीए से भारतीय किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के हित सुरक्षित रहें। साथ ही, भारतीय उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने में यह समझौता अहम भूमिका निभाएगा। इससे निर्यात बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारतीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

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