रिपोर्ट के बाद तेज होंगी तैयारियां
निर्वाचन आयोग द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने के बाद पंचायती राज विभाग तेजी से डाटा संकलन में जुट गया है। जैसे ही यह रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाएगी, चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अगले चरणों पर काम शुरू होने की संभावना है। हालांकि अभी तक सरकार या शासन स्तर पर खुलकर चुनाव की तारीखों को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, फिर भी राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि पंचायत चुनाव अपने तय समय पर हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री से मिलेंगे पंचायती राज मंत्री
पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करना भी खास माना जा रहा है। इस बैठक में चुनाव की समयसीमा, आरक्षण और आयोग की तैयारियों पर चर्चा हो सकती है।
पिछड़ा वर्ग आयोग बना सबसे बड़ा सवाल
पंचायत चुनाव समय पर होंगे या नहीं, इसे लेकर सबसे बड़ा संशय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को लेकर है। अभी तक इस आयोग का गठन नहीं हुआ है। नियमों के अनुसार आयोग को पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देनी होती है, जिसके आधार पर पंचायत चुनाव में सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा।
परिसीमन के बाद बदली वार्डों की तस्वीर
पंचायत चुनाव से पहले वार्डों के परिसीमन का काम पूरा किया जा चुका है। इसके बाद प्रदेश में जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत सदस्यों की संख्या में कमी आई है। जिला पंचायत सदस्य के वार्ड 3050 से घटकर 3020 रह गए हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य के 830 वार्ड कम हुए हैं, जिससे कुल संख्या 75,844 से घटकर 75,014 हो गई है। इसके अलावा ग्राम पंचायत वार्डों की संख्या में भी बड़ी कटौती होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
क्या अप्रैल में हो सकते हैं यूपी पंचायत चुनाव?
पिछले पंचायत चुनाव वर्ष 2021 में अप्रैल महीने में कराए गए थे। इसी आधार पर यह माना जा रहा है कि यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो इस बार भी पंचायत चुनाव अप्रैल के आसपास कराए जा सकते हैं।

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