अमेरिका का बड़ा फैसला, ताइवान खुश, चीन के उड़े होश!

नई दिल्ली। अमेरिका ने एशिया में एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने चीन की चिंता और नाराज़गी दोनों बढ़ा दी हैं। अमेरिका और ताइवान के बीच हुए नए व्यापार समझौते को वॉशिंगटन ने “ऐतिहासिक” करार दिया है, जबकि बीजिंग इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला मान रहा है। इस समझौते के केंद्र में सेमीकंडक्टर उद्योग है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन तय करने वाला सबसे अहम क्षेत्र माना जा रहा है।

सेमीकंडक्टर पर सीधी रणनीतिक चोट

नए समझौते के तहत अमेरिका ताइवान से आने वाले कई उत्पादों पर टैरिफ में और कटौती करेगा। पहले जहां शुल्क 32 प्रतिशत तक था, उसे क्रमशः घटाकर अब 15 प्रतिशत के स्तर पर लाया गया है। यह दर जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिकी साझेदार देशों के बराबर है। इसके बदले ताइवान अमेरिका में लगभग 250 अरब डॉलर का नया निवेश करेगा, जिसमें उन्नत चिप निर्माण इकाइयों और औद्योगिक पार्कों की स्थापना शामिल है।

अमेरिका का साफ संदेश है सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में चीन पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन को मज़बूत करना। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस साझेदारी से अमेरिका में अत्याधुनिक तकनीक, रोज़गार और औद्योगिक क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

ताइवान के साथ रणनीतिक रिश्ते और गहरे

ताइवान सरकार ने भी इस समझौते को दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला बताया है। बीते महीनों में अमेरिका ने ताइवान को अरबों डॉलर के हथियार और सैन्य सेवाएं देने की मंज़ूरी दी है, जिनमें आधुनिक मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, रॉकेट लॉन्चर और हेलीकॉप्टरों के उपकरण शामिल हैं। यह संकेत है कि अमेरिका ताइवान की सुरक्षा को केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सैन्य स्तर पर भी मजबूत कर रहा है।

चीन की बढ़ेगी नाराज़गी और जवाबी कदम

चीन लंबे समय से ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा बताता आया है। ऐसे में अमेरिका–ताइवान के बढ़ते रिश्ते बीजिंग के लिए अस्वीकार्य हैं। हथियारों की बिक्री के बाद चीन ने कई अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे और अब व्यापार समझौते को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया तय मानी जा रही है। चीन का तर्क है कि ये कदम “वन चाइना” नीति का उल्लंघन हैं और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा पैदा करते हैं।

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