केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान, किसानों को मिलेगी बड़ी राहत

नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। रबी सीजन 2025–26 में किसानों की लागत को कम करने और फसल की पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य से उर्वरकों पर नई बढ़ी हुई सब्सिडी लागू करने का निर्णय किया गया है। इससे डीएपी, एनपीके, यूरिया और अन्य प्रमुख उर्वरक अब किसानों को किफायती दामों पर मिलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर सीधे किसानों पर नहीं पड़ेगा।

रबी 2025–26 के लिए सब्सिडी बजट

सरकार ने इस सीजन के लिए उर्वरक सब्सिडी का अनुमानित बजट लगभग ₹37,950 करोड़ तय किया है। यह पिछले सीजन की तुलना में लगभग ₹736 करोड़ अधिक है। पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार ने उर्वरक सब्सिडी पर कुल ₹2.04 लाख करोड़ से अधिक राशि खर्च की है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार लगातार कृषि क्षेत्र को स्थिर और समर्थ बनाने के प्रयास में लगी हुई है।

NBS योजना: पोषक तत्व आधारित सब्सिडी

केंद्र ने सब्सिडी को Nutrient Based Subsidy (NBS) के तहत पोषक तत्वों के आधार पर लागू किया है। इसका मतलब यह है कि अब सब्सिडी केवल बोरी के आकार पर नहीं, बल्कि उसमें मौजूद नाइट्रोजन, फॉस्फेट, पोटाश और सल्फर के वास्तविक वजन के आधार पर मिलेगी। रबी 2025–26 के लिए नाइट्रोजन पर प्रति किलोग्राम ₹43.02 और फॉस्फेट पर ₹47.96 की सब्सिडी निर्धारित की गई है।

प्रमुख उर्वरकों की सब्सिडी

डीएपी (18-46-0-0): ₹29,805 प्रति टन

एनपीके (19-19-19): ₹17,738 प्रति टन

एनपीके (12-32-16): ₹20,890 प्रति टन

एमओपी / पोटाश (0-0-60-0): ₹1,428 प्रति टन

सिंगल सुपर फॉस्फेट (0-16-0-11): ₹7,408 प्रति टन

यूरिया-एसएसपी कॉम्प्लेक्स: ₹9,088 प्रति टन

सरकार का मकसद यह है कि घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रहें, चाहे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों के दाम कितने भी बदलें।

सूक्ष्म पोषक तत्वों और फोर्टिफाइड खाद

इस बार सरकार ने मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी पर विशेष ध्यान दिया है। बोरॉन से लेपित उर्वरक: ₹300 प्रति टन अतिरिक्त सब्सिडी, जिंक से लेपित उर्वरक: ₹500 प्रति टन अतिरिक्त सब्सिडी। इस कदम से किसान अपनी मिट्टी और फसल की जरूरत के अनुसार संतुलित उर्वरक का चयन कर सकेंगे।

सरकार करेगी सब्सिडी की भी निगरानी

किसानों तक सब्सिडी का पूरा लाभ पहुंचाने के लिए निगरानी को कड़ा किया गया है। उर्वरक कंपनियों को लागत और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) की जानकारी सरकार को प्रदान करनी होगी। किसी भी उल्लंघन की स्थिति में कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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