व्यापार में ऐतिहासिक छलांग
वित्त वर्ष 2024–25 में भारत–रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 68.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा केवल 13 अरब डॉलर के आसपास था। यानी महज चार वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार पांच से छह गुना तक बढ़ गया। यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत को भी दर्शाती है।
मित्र देशों पर रूस का बढ़ता भरोसा
रूस के प्रधानमंत्री ने बताया कि पश्चिमी प्रतिबंधों के दबाव के बावजूद रूस ने अपनी आपूर्ति और व्यापारिक नीतियों को तेजी से ढाल लिया है। आज रूस के कुल व्यापार का लगभग 86 प्रतिशत हिस्सा मित्र देशों के साथ हो रहा है। इस सूची में चीन, भारत, बेलारूस और कजाखस्तान जैसे देश प्रमुख हैं। खासतौर पर भारत के साथ व्यापार में हुई तेज बढ़ोतरी ने इस रणनीति को मजबूती दी है।
राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा
रूस ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। जनवरी से अक्टूबर के बीच सभी देशों के साथ व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं की हिस्सेदारी बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंच गई। इनमें से आधे से अधिक लेनदेन रूबल में किए गए। यह आंकड़ा पहले तय 70 प्रतिशत के लक्ष्य से कहीं आगे है और रूस की आर्थिक रणनीति की सफलता को दर्शाता है। भारत के साथ भी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेकर सकारात्मक पहल देखने को मिल रही है।
ऊर्जा से आगे बढ़ती साझेदारी
भारत–रूस संबंध अब केवल कच्चे तेल और गैस तक सीमित नहीं रहे। ऊर्जा व्यापार ने जरूर इस साझेदारी को गति दी, लेकिन अब फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा, तकनीक, उर्वरक और औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों का जुड़ाव तेजी से बढ़ रहा है। यही कारण है कि दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।

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