यह नया सिस्टम ड्रोन, क्रूज मिसाइल और दुश्मन के लड़ाकू विमानों जैसे खतरों को 20 किलोमीटर से अधिक दूरी से निशाना बना सकेगा। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तकनीक भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगी, जिनके पास डायरेक्टेड एनर्जी हथियार मौजूद हैं।
क्या है डायरेक्टेड एनर्जी हथियार
पारंपरिक हथियारों की तरह यह सिस्टम गोला-बारूद या मिसाइल का इस्तेमाल नहीं करता। इसके बजाय यह बेहद शक्तिशाली लेजर ऊर्जा से हमला करता है। जैसे ही लेजर बीम लक्ष्य पर केंद्रित होती है, कुछ ही सेकंड में अत्यधिक गर्मी पैदा हो जाती है, जिससे हवा में मौजूद खतरा पूरी तरह निष्क्रिय हो जाता है। यह तकनीक मौजूदा कम क्षमता वाले लेजर सिस्टम की तुलना में कहीं अधिक असरदार मानी जा रही है।
किस तकनीक पर आधारित है यह सिस्टम
DRDO जिस लेजर हथियार को विकसित कर रहा है, वह आधुनिक हाइब्रिड लेजर तकनीक पर आधारित है। इसमें विद्युत ऊर्जा और गैस आधारित लेजर प्रणाली को एक साथ जोड़ा गया है। इससे न केवल लेजर की शक्ति बढ़ती है, बल्कि उसकी स्थिरता और लंबी दूरी तक प्रभाव बनाए रखना भी संभव होता है। सिस्टम को इस तरह तैयार किया गया है कि धूल, धुआं और मौसम जैसी बाधाओं का उस पर न्यूनतम असर पड़े।
यह आधुनिक लेजर हथियार कैसे करता है हमला
इस लेजर हथियार में अत्याधुनिक ऑप्टिकल और नियंत्रण प्रणाली लगी होगी, जो बीम को बेहद सटीकता के साथ लक्ष्य तक पहुंचाएगी। वातावरण में होने वाले बदलावों को यह सिस्टम तुरंत समझकर संतुलित कर लेता है, जिससे लेजर की दिशा और ताकत बरकरार रहती है। इसी वजह से यह तेज गति से उड़ने वाले छोटे ड्रोन जैसे लक्ष्यों को भी आसानी से भेद सकता है।
कई टेस्टिंग में मिली सफलता, अगला चरण तय
DRDO इस लेजर सिस्टम के कई अहम हिस्सों का सफल परीक्षण कर चुका है। अलग-अलग भौगोलिक इलाकों और मौसम की परिस्थितियों में इसके प्रदर्शन को परखा गया है। फिलहाल कुछ तकनीकी मॉड्यूल पर काम जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि 2026 तक इसके सभी व्यापक परीक्षण पूरे कर लिए जाएंगे, जिसके बाद 2027 में फील्ड ट्रायल की शुरुआत की जा सकती है।

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