क्यों आगे खिसक रहा है वेतन आयोग
परंपरागत रूप से हर दस साल में नया वेतन आयोग लागू किया जाता है। 7वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुआ था, इसी आधार पर 8वें वेतन आयोग के 2026 से लागू होने की उम्मीद थी। हालांकि, ICRA का आकलन है कि आयोग की सिफारिशें तैयार होने में अभी डेढ़ साल तक का समय लग सकता है। ऐसे में निकट भविष्य में सैलरी रिवीजन की संभावना कमजोर दिख रही है।
एरियर बना सरकार की चिंता
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब 8वां वेतन आयोग लागू होगा, तो सरकार इसे पिछली तारीख से प्रभावी कर सकती है। इसका मतलब यह होगा कि कर्मचारियों को एक साथ लंबी अवधि का एरियर देना पड़ेगा। इससे किसी एक वित्तीय वर्ष में सरकारी खर्च अचानक तेज़ी से बढ़ सकता है। अनुमान है कि उस समय वेतन मद में खर्च 40 से 50 प्रतिशत तक उछाल ले सकता है।
पुराने अनुभवों से बढ़ी सतर्कता
पिछले वेतन आयोगों का अनुभव सरकार के लिए चेतावनी की तरह है। 7वें वेतन आयोग में सीमित एरियर के बावजूद खर्च में बड़ा इजाफा हुआ था, जबकि 6वें वेतन आयोग के समय लंबी देरी के कारण कई वर्षों तक बजट पर दबाव बना रहा। यही वजह है कि 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकार अतिरिक्त सावधानी बरत रही है।
बजट रणनीति में बदलाव के संकेत
ICRA का मानना है कि सरकार आने वाले बजट में पूंजीगत खर्च को पहले बढ़ाकर भविष्य के वेतन और पेंशन बोझ के लिए जगह बना सकती है। अनुमान है कि FY2027 में कैपेक्स में दो अंकों की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास योजनाओं को रफ्तार मिलेगी और बाद में आने वाले खर्च का संतुलन साधा जा सकेगा। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एरियर और वेतन वृद्धि का इंतजार अभी लंबा खिंचता दिख रहा है, जबकि सरकार के सामने कर्मचारियों की उम्मीदों और वित्तीय संतुलन के बीच तालमेल बैठाना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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