निगम की तैयारी और उद्देश्य
सचिवालय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव मनीष चौहान ने बताया कि निगम का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से कानूनी रूप से किया जा चुका है। पहले से नियुक्त अमृता सोनी निगम की प्रबंध निदेशक हैं। निगम का कार्यालय पिकप भवन में तैयार किया जा रहा है, और जल्द ही यहां से निगम की गतिविधियां संचालित होंगी। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम गैर-लाभकारी संस्था के रूप में कार्य करेगा और इसका उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना, उनकी भर्तियों को नियमित करना और मानदेय बढ़ाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।
क्या है इसकी पृष्ठभूमि?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 2 सितंबर 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में निगम के गठन का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। इसके बाद 20 सितंबर 2025 को शासनादेश जारी कर निगम का औपचारिक गठन किया गया। तब से ही राज्य में बेरोजगार युवाओं और विभागों में आउटसोर्स पर काम कर रहे करीब चार लाख कर्मचारियों को भर्तियों और बढ़े मानदेय का इंतजार था।
कर्मचारियों और युवाओं के लिए लाभ
इस कदम से न केवल वर्तमान में आउटसोर्स पर कार्यरत कर्मचारियों का मानदेय बढ़ेगा, बल्कि नए युवाओं के लिए सरकारी विभागों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही यह पहल कर्मचारियों के हितों और रोजगार सुरक्षा को मजबूत करेगी। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के सक्रिय होते ही यह प्रक्रिया तेज होगी और कर्मचारियों को उनके हक की राशि और भर्तियों में पारदर्शिता मिलेगी। इससे प्रदेश में आउटसोर्स रोजगार प्रणाली में स्थिरता और विश्वास दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

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