सोमवार को भारत पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत-अमेरिका संबंध वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भी मजबूत बने हुए हैं। गोर ने जोर देकर कहा कि "असली दोस्त असहमति रख सकते हैं, लेकिन वे हमेशा समाधान निकालते हैं।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देश लगातार सक्रिय संवाद में बने हुए हैं।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का संकेत
पैक्स सिलिका में भारत की प्रस्तावित भागीदारी उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देगी। इस पहल में कच्चे खनिज से लेकर अत्याधुनिक तकनीकी अनुप्रयोगों तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला शामिल है। गोर ने बताया कि यह पहल केवल तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वसनीय साझेदार देशों के बीच संवेदनशील तकनीकों की सुरक्षा और नवाचार आधारित सहयोग को बढ़ावा देती है।
पैक्स सिलिका: क्या है यह पहल?
पैक्स सिलिका का उद्देश्य सुरक्षित और नवाचारी सिलिकॉन सप्लाई चेन का निर्माण करना है। इसके तहत शामिल हैं: क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा इनपुट, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति प्रबंधन।
मौजूदा सदस्य और भारत
पहले शिखर सम्मेलन में जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया शामिल थे। इसके अलावा ताइवान, यूरोपीय संघ, कनाडा और OECD ने अतिथि योगदान दिया।
भारत की प्रस्तावित भागीदारी इसे वैश्विक सेमीकंडक्टर और एआई सप्लाई चेन के मुख्य खिलाड़ियों के बीच नीति समन्वय और तकनीकी लचीलापन के केंद्र में रखेगी। जैसे-जैसे एआई और अन्य अत्याधुनिक तकनीकें वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय शक्ति में अहम भूमिका निभा रही हैं, भारत की भागीदारी इसे भविष्य की वैश्विक तकनीकी व्यवस्था में महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना देगी।

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