केंद्र सरकार का बड़ा अपडेट: कर्मचारियों के ग्रेच्युटी नियम हुए स्पष्ट

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है। डिपार्टमेंट ऑफ पेंशन एंड पेंशनर्स वेलफेयर द्वारा जारी नए ऑफिस मेमोरेंडम (OM) का उद्देश्य लंबे समय से चली आ रही भ्रांतियों को दूर करना और यह स्पष्ट करना है कि किन परिस्थितियों में ग्रेच्युटी की सीमा लागू होगी और किन मामलों में नहीं।

Rule 4A क्या कहता है

CCS (Payment of Gratuity under NPS) Amendment Rules, 2025 के Rule 4A के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी केंद्र सरकार और किसी PSU या स्वायत्त संस्था—दोनों से अलग-अलग ग्रेच्युटी प्राप्त करता है, तो कुल ग्रेच्युटी पर एक अधिकतम सीमा लागू होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक ही सेवा अवधि के लिए दोहरी या अत्यधिक ग्रेच्युटी का भुगतान न हो।

दोबारा सरकारी सेवा करने वालों के लिए नियम

यदि कोई कर्मचारी सेवानिवृत्ति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति या करुणा ग्रेच्युटी लेने के बाद पुनः सरकारी सेवा में नियुक्त होता है, तो सामान्यतः उसे दोबारा सेवा अवधि के लिए अलग से ग्रेच्युटी नहीं दी जाएगी। सरकार ने साफ किया है कि पहले से ग्रेच्युटी प्राप्त कर चुके कर्मचारी को पुनर्नियुक्ति अवधि के लिए नई ग्रेच्युटी का दावा नहीं होगा।

PSU से केंद्र सरकार में आने पर क्या लाभ मिलेगा

जो कर्मचारी PSU या स्वायत्त संस्था से विधिवत अनुमति लेकर केंद्र सरकार की सेवा में आते हैं, उन्हें केंद्र सरकार की सेवा अवधि के लिए ग्रेच्युटी मिलेगी। साथ ही PSU या स्वायत्त संस्था से मिली ग्रेच्युटी भी सुरक्षित रहेगी। हालांकि, दोनों को मिलाकर मिलने वाली कुल ग्रेच्युटी उस अधिकतम राशि से अधिक नहीं हो सकती, जो कर्मचारी को उसकी कुल सेवा अवधि और केंद्र सरकार से सेवानिवृत्ति के समय के वेतन के आधार पर देय होती।

राज्य और केंद्र—दोनों सेवाओं का मामला हो तो क्या?

सरकार ने 12 फरवरी 2020 के पुराने निर्देशों का भी पुनः उल्लेख किया है। यदि कोई कर्मचारी पहले राज्य सरकार और बाद में केंद्र सरकार की सेवा करता है और दोनों जगहों से ग्रेच्युटी प्राप्त करता है, तो कुल ग्रेच्युटी पर सीमा लागू होगी। यह सीमा उस ग्रेच्युटी से अधिक नहीं हो सकती, जो कर्मचारी को केवल केंद्र सरकार की निरंतर सेवा में रहते हुए उसी अंतिम वेतन पर सेवानिवृत्त होने पर मिलती।

सैन्य सेवा के बाद सिविल सेवा वालों को होगी बड़ी राहत

इस ऑफिस मेमोरेंडम का सबसे राहत भरा पहलू उन कर्मचारियों के लिए है, जिन्होंने पहले सैन्य सेवा दी और बाद में सिविल सेवा में शामिल हुए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को सैन्य सेवा के लिए पहले ही ग्रेच्युटी मिल चुकी है, तो सिविल सेवा के दौरान मिलने वाली ग्रेच्युटी पर कोई अतिरिक्त सीमा नहीं लगेगी। अर्थात सैन्य ग्रेच्युटी का सिविल ग्रेच्युटी पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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