विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और जापानी समकक्ष तोशिमित्सु मोटेगी ने एआई संवाद की शुरुआत की और दुर्लभ खनिजों पर सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) गठित करने का निर्णय लिया। यह कदम केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे की रणनीति
भारत और जापान ने आर्थिक सुरक्षा पहल के तहत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करने पर भी सहमति व्यक्त की। इसके तहत निजी कंपनियों और विशेषज्ञों के साथ साझा संवाद आयोजित किया जाएगा, ताकि निवेश, व्यापार और प्रौद्योगिकी में नए अवसरों को विकसित किया जा सके। विदेश सचिव और जापान के उप विदेश मंत्री की अध्यक्षता में इसका दूसरा दौर 2026 की पहली छमाही में आयोजित होगा।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि बैठक में सप्लाई चेन की मजबूती, निवेश, नवाचार, रक्षा और जन-समुदायों के बीच आदान-प्रदान जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने पिछले साल जापान में आयोजित वार्षिक शिखर सम्मेलन की प्रगति की समीक्षा की और अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई और दुर्लभ खनिज जैसे क्षेत्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में निर्णायक साबित होंगे। इन पहलों से भारत और जापान के बीच आर्थिक सहयोग को नया आयाम मिलेगा और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। तोशिमित्सु मोटेगी 15 से 17 जनवरी तक भारत में हैं, और यह मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की हालिया बैठक के बाद दोनों देशों के बीच रणनीतिक संवाद का एक और महत्वपूर्ण चरण है।

0 comments:
Post a Comment