हर महीने 25 तारीख से शुरू होगी वेतन भुगतान की तैयारी
नई व्यवस्था के तहत प्रशासन हर महीने की 25 तारीख से ही वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर देगा। पुराने वेतनमान पर कार्यरत नियमित शिक्षकों के लिए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) 20 से 25 तारीख के बीच शिक्षकों की अनुपस्थिति (एबसेंट) रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को भेजेंगे। इसके बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी (स्थापना) 25 तारीख तक वेतन पत्रक (सैलरी स्लिप) तैयार कर 26 तारीख को कोषागार को सौंपेंगे। कोषागार 30 तारीख तक इसे स्वीकृत करेगा और पहली तारीख को शिक्षकों के बैंक खाते में वेतन भेज दिया जाएगा।
संस्कृत, मदरसा शिक्षक और रात्रि प्रहरी भी शामिल
इस एसओपी के दायरे में केवल सामान्य शिक्षक ही नहीं, बल्कि संस्कृत और मदरसा शिक्षक, जिन्हें राजकोष से वेतन मिलता है, उन्हें भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही रात्रि प्रहरियों को भी हर महीने की पहली तारीख को वेतन देने का प्रावधान किया गया है।
कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों के लिए भी तय होगा प्रक्रिया
समग्र शिक्षा के तहत कार्यरत कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों के लिए भी अलग लेकिन स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है। इनके लिए 20 से 22 तारीख तक अनुपस्थिति रिपोर्ट जमा की जाएगी। 26 तारीख तक वेतन पत्रक तैयार कर कोषागार को भेजा जाएगा, जिसे 30 तारीख तक स्वीकृति मिलेगी। इसके बाद जिला शिक्षा कार्यालय 26 से 29 तारीख के बीच बैंक को भेजे जाने वाला परामर्श तैयार करेगा और 30 तारीख को अंतिम रूप देकर बैंक भेज दिया जाएगा।
अधिकारियों को भेजा गया निर्देश
इस पूरी प्रक्रिया को सुचारु रूप से लागू करने के लिए प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला कार्यक्रम अधिकारियों को आवश्यक निर्देश पत्र भेज दिया है। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि राज्यकोष से वेतन पाने वाले सभी कर्मियों को इस नई व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
समय पर सैलरी से बढ़ेगा मनोबल
इस फैसले से न सिर्फ शिक्षकों की आर्थिक योजनाएं बेहतर होंगी, बल्कि उनका मनोबल भी बढ़ेगा। समय पर वेतन मिलने से शिक्षकों का ध्यान पूरी तरह शिक्षण कार्य पर केंद्रित रह सकेगा। कुल मिलाकर, यह कदम बिहार के शिक्षा तंत्र को अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।

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