एनएच-139 बना जाम की बड़ी वजह
औरंगाबाद शहर के बीचोंबीच गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-139 (NH-139) यहां की सबसे बड़ी ट्रैफिक समस्या बन चुका है। दिन-रात भारी वाहन, ट्रक, हाइवा और ट्रेलर इसी मार्ग से गुजरते हैं, जिससे शहर के प्रमुख चौराहों और बाजार क्षेत्रों में अक्सर लंबा जाम लग जाता है। आम लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चों, मरीजों और व्यापारियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
पहले भी बनी थी योजना, लेकिन अटक गई
इस समस्या के समाधान के लिए पहले करीब 9 किलोमीटर लंबे बाईपास का प्रस्ताव तैयार कर एनएचएआई (NHAI) को भेजा गया था। यह प्रस्ताव शहरी इलाके से होकर गुजरने वाला था, जिसमें भूमि अधिग्रहण की लागत काफी अधिक आ रही थी। अनुमानित खर्च करीब 835 करोड़ रुपये था, जिसमें बड़ा हिस्सा जमीन अधिग्रहण पर खर्च होना था। अधिक लागत के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी और लोगों को निराशा हाथ लगी।
अब नए सिरे से 19 किलोमीटर का बाईपास
अब विभाग ने नए सिरे से योजना तैयार की है। इस बार प्रस्तावित बाईपास करीब 19 किलोमीटर लंबा होगा और यह नगर परिषद क्षेत्र से बाहर से गुजरेगा। इससे भूमि अधिग्रहण की लागत कम होगी और शहर के भीतर किसी तरह की तोड़फोड़ की जरूरत नहीं पड़ेगी। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारी वाहन सीधे बाईपास से गुजरेंगे और उन्हें शहर में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा।
जिले के किन इलाकों से गुजरेगा यह बाईपास
प्रस्तावित बाईपास खैरी मोड़ से शुरू होकर मंजुराही, रायपुरा और पवई गांवों से होते हुए भड़कुर गांव के पास अंबा जाने वाली सड़क से एनएच-139 से जुड़ेगा। पूरा मार्ग शहरी क्षेत्र के बाहर रहेगा, जिससे औरंगाबाद शहर को रोजाना लगने वाले जाम से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
डीपीआर तैयार, जल्द भेजा जाएगा एनएचएआई को
नए एलाइन्मेंट का डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर लिया गया है। इसे जल्द ही एनएचएआई को भेजा जाएगा। जिस डीपीआर को मंजूरी मिलेगी, उसी के आधार पर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। शहर के ओवरब्रिज, जीटी रोड, रामाबांध बस स्टैंड और सर्विस रोड जैसे इलाकों में जहां रोज जाम की स्थिति बनती है, वहां हालात में बड़ा सुधार होने की संभावना है।

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