अमेरिका टॉप पर, भारत दूसरे नंबर पर, चीन 5वें स्थान पर!

नई दिल्ली: भारत वैश्विक निवेश के नक्शे पर तेजी से मजबूत होता जा रहा है। एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे के अनुसार, अमेरिका के बाद भारत अब दुनिया भर के सीईओ के लिए निवेश का दूसरा सबसे पसंदीदा देश बनकर उभरा है। इस सूची में जर्मनी और ब्रिटेन भी शामिल हैं, जबकि चीन पांचवें स्थान पर खिसक गया है। यह सर्वे कंसल्टिंग फर्म PwC द्वारा किया गया है, जिसमें वैश्विक कॉर्पोरेट नेतृत्व की निवेश प्राथमिकताओं का आकलन किया गया।

भारत में निवेश को लेकर बढ़ा भरोसा

सर्वे के मुताबिक, वर्ष 2026 तक करीब 13 प्रतिशत वैश्विक सीईओ भारत में निवेश करने की योजना बना रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है। वहीं, अमेरिका अब भी निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है, जिसे 35 प्रतिशत सीईओ ने प्राथमिकता दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में यह भरोसा सरकार की नीतिगत पहल, जैसे जीएसटी, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) और कारोबारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने वाले सुधारों के कारण बढ़ा है।

टैरिफ को लेकर कम चिंता

दिलचस्प बात यह है कि भारत में बहुत कम सीईओ टैरिफ को अपने कारोबार के लिए बड़ा खतरा मानते हैं। सर्वे के अनुसार, केवल 11 प्रतिशत भारतीय सीईओ को ही शुल्क बढ़ने से गंभीर चिंता है। इसके बावजूद कुछ सेक्टरों जैसे टेक्सटाइल, लेदर और समुद्री उत्पाद पर असर पड़ा है, जिसके चलते कंपनियां नए निर्यात बाजार और व्यापार समझौतों की ओर देख रही हैं।

घरेलू बाजार से मजबूत उम्मीदें

भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर कॉर्पोरेट जगत का नजरिया काफी सकारात्मक है। करीब 77 प्रतिशत भारतीय सीईओ को देश के घरेलू बाजार से मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है। साथ ही, 57 प्रतिशत सीईओ को अपनी कंपनियों की आय बढ़ने को लेकर पूरा भरोसा है, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है।

इनोवेशन बना ग्रोथ का आधार

भारतीय कंपनियां अब नए क्षेत्रों में कदम रखकर अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं। बड़ी संख्या में सीईओ ने बताया कि उनकी कंपनियों ने हाल के वर्षों में नए सेक्टरों में निवेश किया है। हालांकि, आर्थिक उतार-चढ़ाव और साइबर सुरक्षा जैसे जोखिम अब भी कारोबार के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

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