RBI के अनुमान से भी आगे
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान जताया है। यह आंकड़ा इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 7.3% के अनुमान से भी अधिक है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार को अपनी नीतियों, निवेश माहौल और घरेलू बाजार की मजबूती पर पूरा भरोसा है।
वैश्विक दबावों के बावजूद स्थिरता
दुनिया के कई बड़े देश आर्थिक धीमी गति और व्यापारिक अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। अमेरिका और अन्य देशों की नीतियों के कारण वैश्विक बाजार में चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे समय में भारत की अर्थव्यवस्था ने अपने लचीलापन और मजबूती का परिचय दिया है। घरेलू बाजार की ताकत, सेवा क्षेत्र का विस्तार और उत्पादन क्षमता ने बाहरी झटकों का असर कम किया है।
घरेलू विकास और रोजगार का योगदान
देश की तेजी से बढ़ती खपत, निवेश और रोजगार के अवसर ग्रोथ को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवा क्षेत्र में निवेश से न सिर्फ आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
भारत: वैश्विक ग्रोथ इंजन में सबसे आगे
इस विकास दर के साथ भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भरोसेमंद ग्रोथ इंजन बन सकता है। जहां कई अन्य देश धीमी गति से जूझ रहे हैं, भारत अपनी मजबूती और तेज़ी से बढ़ते निवेश के दम पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। 7.4% की संभावित वृद्धि दर न केवल भारत के आर्थिक स्वास्थ्य का संकेत है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।
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