वित्तीय वर्ष 2025–26 में इस योजना के माध्यम से प्रदेश में 94 नई उद्योग इकाइयाँ शुरू की गई हैं, जिनमें कुल ₹648.63 लाख का निवेश हुआ। छोटे समय में ही इस पहल से 2,586 युवाओं को उनके गांव के पास ही स्थायी और सम्मानजनक रोजगार मिला है।
आसान ऋण और ब्याज में राहत
योजना के तहत ग्रामीण युवा 18–50 वर्ष के आयु वर्ग के लिए अपना उद्योग शुरू करने में सक्षम बन रहे हैं। इसके लिए 10 लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध है। सामान्य वर्ग के लिए सरकार 4% से अधिक का ब्याज स्वयं वहन करती है। जबकि आरक्षित वर्ग (SC/ST, OBC, महिला, अल्पसंख्यक, दिव्यांग) के लिए 100% ब्याज सरकार द्वारा चुकाया जाता है।
स्वयं का योगदान: सामान्य वर्ग को 10%, आरक्षित वर्ग को 5% निवेश करना होता है।
योजना की पारदर्शिता और प्रबंधन
लाभार्थियों का चयन जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाले जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से किया जाता है, जिससे योजना पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त रहती है।
योजना के प्रमुख लाभ
स्थानीय रोजगार: उद्योग गांवों में लगने से युवाओं का शहरों की ओर पलायन कम हुआ।
महिला सशक्तिकरण: महिलाओं को विशेष प्राथमिकता देकर आर्थिक स्वतंत्रता दी जा रही है।
स्थायी रोजगार और ग्रामीण विकास: उद्योगों का जाल पूरे प्रदेश में रोजगार और आत्मनिर्भरता बढ़ा रहा है।
हस्तशिल्प और पारंपरिक कला: कारीगर अब आधुनिक तकनीक से जुड़कर अपने उत्पाद बाजार में बेच सकते हैं।
विकास की दिशा
मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना ने साबित कर दिया है कि ग्रामीण संसाधनों और युवाओं की ऊर्जा का सही संयोजन प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में इन इकाइयों की संख्या बढ़ाकर हर ब्लॉक तक रोजगार के अवसर पहुँचाए जाएँ।

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