मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य में सेमीकंडक्टर और उससे जुड़ी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए नई प्रोत्साहन योजनाओं पर मुहर लगी। बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि मंत्रिमंडल के सामने 14 प्रस्ताव रखे गए थे, जिनमें से 13 को स्वीकृति मिल गई है।
3,000 करोड़ से ज्यादा निवेश पर फोकस
सरकार का लक्ष्य उन कंपनियों को यूपी में लाना है, जो सेमीकंडक्टर सेक्टर में 3,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक का निवेश करने को तैयार हैं। इससे न सिर्फ अत्याधुनिक तकनीक का विकास होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
वैश्विक कंपनियों को लाने की रणनीति
दरअसल, वर्तमान में सेमीकंडक्टर उद्योग पर अमेरिका, यूरोप, जापान और ताइवान का वर्चस्व है। उत्तर प्रदेश सरकार चाहती है कि वैश्विक स्तर की कंपनियां भारत, खासकर यूपी में निवेश करें और राज्य को इस क्षेत्र में एक मजबूत पहचान दिलाएं। इसलिए लिए सरकार ने नई नीति बनाई हैं।
क्या है यूपी की सेमीकंडक्टर नीति?
जनवरी 2024 में लागू की गई उत्तर प्रदेश की सेमीकंडक्टर नीति के तहत निवेशकों को कई आकर्षक सुविधाएं दी जा रही हैं। इसमें ब्याज पर सब्सिडी, कर्मचारियों की लागत की प्रतिपूर्ति, 10 साल तक जीएसटी में छूट और बिजली दरों में सब्सिडी जैसे प्रावधान शामिल हैं। कंपनियों को एक दशक तक प्रति यूनिट बिजली पर विशेष राहत भी मिलेगी। इसके अलावा राज्य में काम करने वाले पेशेवरों के लिए ईपीएफ अंशदान की पूरी प्रतिपूर्ति (निर्धारित सीमा तक) और जल शुल्क में छूट जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी। सरकार का मानना है कि ये कदम निवेशकों के लिए यूपी को बेहद आकर्षक बनाएंगे।

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