हर जिले में रोजगार और उद्योग का केंद्र
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सिर्फ निवेश का केंद्र नहीं बल्कि स्थायी रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता का हब बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मॉडल जमीनी स्तर पर युवाओं को अवसर देगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। प्रत्येक जिले में न्यूनतम 50 एकड़ या उससे अधिक क्षेत्रफल में यह जोन विकसित होगा। इसमें जी+3 भवन में ‘सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं कौशल विकास केंद्र’ स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र रोजगार, प्रशिक्षण और कॉमन फैसिलिटी सेंटर के रूप में कार्य करेगा।
केंद्र में उपलब्ध सुविधाएं
रोजगार एवं कौशल विकास केंद्र में निम्नलिखित सुविधाएं होंगी:
ओडीओपी उत्पादों के लिए डिस्प्ले जोन
प्रशिक्षण हॉल और मीटिंग सुविधाएं
जिला उद्योग केंद्र और जिला रोजगार कार्यालय
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम
कॉमन सर्विस सेंटर और बैंकिंग सुविधा
इस तरह यह केंद्र युवाओं और उद्यमियों के लिए वन-स्टॉप सपोर्ट सिस्टम के रूप में विकसित होगा।
औद्योगिक जोन का डिजाइन और संचालन
मुख्यमंत्री ने बताया कि औद्योगिक जोन का डिजाइन ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल पर आधारित होगा। इससे एमएसएमई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के उद्योगों को तुरंत संचालन की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही स्किलिंग, हैंडहोल्डिंग और प्लेसमेंट सेवाओं को अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उद्योग और सेवा क्षेत्र से जुड़े प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन, रोजगार मेलों, उद्यमिता प्रशिक्षण और मेंटरिंग कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को सीधे उद्योगों से जोड़ा जाए।
ओडीओपी, एमएसएमई और कौशल विकास का समन्वय
इस परियोजना को ओडीओपी, एमएसएमई और राज्य के कौशल विकास कार्यक्रमों के साथ समन्वयित करके लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों, उद्योगों और युवाओं को एक साझा मंच प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में आवश्यक भूमि चिन्हित करने और नियमित समीक्षा के माध्यम से समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

0 comments:
Post a Comment