बिहार में अब डी फार्मा वाले ही बनेंगे फार्मासिस्ट

पटना। बिहार के फार्मासिस्टों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्णय दिया है, जो राज्य में फार्मासिस्ट नियुक्तियों की दिशा को स्पष्ट करता है। कोर्ट ने कहा कि फार्मासिस्ट के पद पर बहाली के लिए न्यूनतम योग्यता डी फार्मा होना अनिवार्य है। यह आदेश पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज करने के बाद आया।

कोर्ट का निर्णय और राज्य सरकार का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बी फार्मा और एम फार्मा धारक उम्मीदवार फार्मासिस्ट के पद पर नियुक्त नहीं हो सकते। हालांकि, वे अन्य उच्च पदों पर बहाल होने के लिए स्वतंत्र हैं। राज्य सरकार द्वारा बनाई गई नियमावली को भी कोर्ट ने सही ठहराया। इस फैसले के बाद राज्य सरकार द्वारा निर्धारित डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी फार्मा) न्यूनतम योग्यता की स्थिति पूरी तरह से मान्य हो गई है।

बिहार में फार्मासिस्ट की भर्ती प्रक्रिया

बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BPSC) ने 2473 पदों पर नियमित बहाली के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया था। फार्मासिस्ट के पदों के लिए शैक्षणिक योग्यताएं इस प्रकार था: विज्ञान में इंटरमीडिएट उत्तीर्ण होना, राज्य के फार्मेसी संस्थान से डी फार्मा की डिप्लोमा योग्यता, बिहार फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण। यदि कोई उम्मीदवार डी फार्मा के बाद बी फार्मा या एम फार्मा कर चुका है, तो वह भी इस पद के योग्य माना गया था।

परीक्षा और अनुभव का महत्व

बिहार फार्मासिस्ट संवर्ग नियमावली 2014 में संशोधन कर यह स्पष्ट किया गया कि फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा में 75 अंक परीक्षा के लिए और 25 अंक अनुभव के लिए निर्धारित किए जाएंगे। इससे अनुभव और योग्यता दोनों का मूल्यांकन सुनिश्चित होगा।

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