ट्रंप को बड़ा झटका: भारत ने खेला खेल, अमेरिका की नींद उड़ी

नई दिल्ली। दावोस में हुई वैश्विक आर्थिक चर्चा के दौरान यह साफ हो गया कि भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब हैं। इस डील को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, क्योंकि इसके लागू होने से लगभग 2 अरब लोगों का साझा बाजार तैयार होगा, जो विश्व GDP का करीब 25% हिस्सा प्रस्तुत करेगा।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दावोस में कहा कि भारत-ईयू फ्री ट्रेड डील निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अभी कुछ अंतिम तकनीकी मुद्दे बाकी हैं, लेकिन समझौता दोनों पक्षों के लिए एक बड़ा अवसर साबित होगा।

भारत दौरे पर आएंगी EU की शीर्ष टीम

25 से 27 जनवरी के बीच वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भारत दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर वार्ता करेंगे। 27 जनवरी को होने वाले इंडिया-ईयू समिट में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत पूरी होने की घोषणा की संभावना है।

व्यापार और निवेश में बड़ा उछाल

यूरोपीय यूनियन पहले से ही भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-ईयू के बीच 135 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। प्रस्तावित FTA से ऑटो, फार्मा, टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा निवेश और व्यापारिक उछाल आने की उम्मीद है।

वैश्विक रणनीति में भारत की मजबूती

यह डील ऐसे समय पर सामने आई है जब अमेरिका की सख्त ट्रेड नीतियों और टैरिफ के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है। भारत और 27 देशों वाले EU इस चुनौती के बीच भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। इस डील से भारतीय कंपनियों को यूरोप के डिफेंस प्रोग्राम SAFE में भागीदारी का अवसर भी मिलेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि इंडिया-ईयू फ्री ट्रेड डील न केवल व्यापार बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की राजनीतिक और आर्थिक ताकत को और मजबूत करेगी। इस कदम से भारत अमेरिका और अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ प्रतिस्पर्धा में भी नए अवसर हासिल कर सकता है।

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