ग्रामीण विकास मंत्रालय का बजट
इस वित्तीय वर्ष में ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए 1.88 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 8% अधिक है। इसमें प्रमुख योजनाओं का हिस्सा इस प्रकार है:
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS): 86,000 करोड़ रुपये
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G): 54,832 करोड़ रुपये
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY): 19,000 करोड़ रुपये
इन तीन प्रमुख योजनाओं पर खर्च कुल बजट का लगभग 85% है।
अगले बजट में संभावित बढ़ोतरी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए अगले बजट में मौजूदा संशोधित अनुमान से लगभग 11% अधिक फंड रखा जा सकता है। वहीं, ग्रामीण आवास और सड़कों की योजनाओं के लिए इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना है।
सरकार VB-G RAM G योजना (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन) के तहत MGNREGS को और प्रभावी बनाने की तैयारी कर रही है। इस योजना के तहत अगले वित्तीय वर्ष में 95,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च का अनुमान है।
ग्रामीण इलाकों में इसका असर
बजट में बढ़ोतरी से ग्रामीण इलाकों में कई तरह के फायदे होंगे। रोजगार गारंटी योजना से अकुशल मजदूरों की आमदनी बढ़ेगी। ग्रामीण आवास योजनाओं से स्थायी घर बनेंगे और जीवन स्तर सुधरेगा। ग्रामीण सड़कों और बुनियादी ढांचे के निर्माण से क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। इन सबका संयुक्त प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा और लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।
मौजूदा वित्तीय वर्ष की स्थिति
इस वित्तीय वर्ष में ग्रामीण आवास और सड़क योजनाओं पर खर्च अपेक्षित से कम रहा है। PMAY-G के तहत इस साल सरकार ने 3.51 मिलियन घर बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक केवल 1.8 मिलियन घर ही पूरे हो पाए हैं। PMGSY योजना में नए चरण के गांवों की सूची तैयार करने में अधिक समय लगने के कारण खर्च अपेक्षा के मुताबिक नहीं हो सका।
सरकार ने 2024 में PMGSY के चौथे और नए चरण के लिए 70,125 करोड़ रुपये का पांच साल का पैकेज मंजूर किया था। आने वाले महीनों में निर्माण कार्य में तेजी आने की संभावना है, जिससे अतिरिक्त फंड की जरूरत भी बढ़ेगी। बजट में सरकार इसपर ध्यान दे सकती हैं।

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