बता दें की इस कमी का कारण है केंद्र सरकार की रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत दी जा रही सब्सिडी। इस योजना के तहत पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ता, और सरकार 900 रुपये की सब्सिडी देती है। अब यही मीटर नए कनेक्शन में भी लगाए जा रहे हैं, जिससे नए कनेक्शन धारकों को सब्सिडी का पूरा लाभ मिलेगा।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि आरडीएसएस योजना पहले 31 मार्च 2026 तक थी, लेकिन इसे अब 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से अनुदान की स्थिति को यथावत रखने की सहमति भी ले ली है। इसके चलते बिजली कंपनियों को सुनिश्चित करना होगा कि सब्सिडी का पूरा लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचे।
उपभोक्ता परिषद ने यह भी बताया कि स्लैब व्यवस्था के कारण कुछ क्षेत्रों में, खासकर 40 मीटर से कम दूरी पर कनेक्शन लेने वालों को नुकसान हो रहा था। अब इस व्यवस्था में बदलाव के बाद ऐसे उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकेगी। अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस दिशा में प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इस बदलाव से न केवल नए कनेक्शन लेना आसान और सस्ता होगा, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए बिजली की लागत में भी सीधा लाभ आएगा।
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