अमेरिकी बैन बेअसर! भारत पहुंच रहे रूसी तेल के टैंकर, रूस ने निकाला नया रास्ता

नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा रूसी तेल कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद भारत को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति जारी है। अंतर बस इतना है कि अब यह तेल पुराने बड़े सप्लायरों के बजाय नए और अपेक्षाकृत छोटे व्यापारियों के जरिए भारत पहुंच रहा है। यानी रूस ने प्रतिबंधों के बीच अपना रास्ता बदल लिया है और भारत की ऊर्जा जरूरतों की आपूर्ति बनी हुई है।

बड़े नाम हैं पीछे, अब नए ट्रेडर आगे

अमेरिकी बैन के बाद रूस की दिग्गज तेल कंपनी रोसनेफ्ट से आने वाली सप्लाई में तेज गिरावट आई है। जहां पहले भारत को रूसी तेल का बड़ा हिस्सा सीधे रोसनेफ्ट से मिलता था, अब उसकी जगह ऐसे व्यापारी ले रहे हैं जो पहले शायद ही कभी भारत को तेल बेचते थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक शिपिंग और ट्रेड डेटा से पता चलता है कि इस महीने के पहले पंद्रह दिनों में रूस से भारत पहुंचे कुल तेल का करीब 43 प्रतिशत हिस्सा पांच नए व्यापारियों के जरिए आया। इनमें कुछ रूसी कंपनियां हैं, जबकि कुछ यूएई से जुड़ी ट्रेडिंग फर्म्स भी शामिल हैं। खास बात यह है कि ये कंपनियां पिछले लगभग दो वर्षों तक भारत को कोई तेल नहीं भेज रही थीं, लेकिन प्रतिबंध लगते ही ये अचानक बड़े सप्लायर बनकर उभरी हैं।

कुल आयात घटा, लेकिन सप्लाई जारी

प्रतिबंधों का असर यह जरूर दिखा कि भारत का रूस से कुल तेल आयात पिछले औसत की तुलना में कम हुआ है। फिर भी, पूरी तरह से सप्लाई रुकने जैसी स्थिति नहीं बनी। रोसनेफ्ट अब भी भारत का एक बड़ा सप्लायर है, लेकिन उसकी हिस्सेदारी पहले की तुलना में काफी घट चुकी है। इसी तरह अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में आई एक और कंपनी लुकोइल से आने वाला तेल भी बहुत कम हो गया है।

नया बड़ा खिलाड़ी बना रुसएक्सपोर्ट

बदलते हालात में रुसएक्सपोर्ट नाम की कंपनी सबसे बड़ा सप्लायर बनकर सामने आई है। यह कंपनी पिछले कुछ महीनों से लगातार भारत को तेल भेज रही है, जबकि उससे पहले लंबे समय तक इसकी भारत में कोई मौजूदगी नहीं थी। इसके अलावा रेडवुड ग्लोबल सप्लाई, विस्टुला डेल्टा, एथोस एनर्जी, अल्गफ मरीन और स्लावियांस्क ईसीओ जैसी कंपनियां भी अचानक महत्वपूर्ण भूमिका में आ गई हैं।

भारतीय कंपनियां भी सतर्क

भारतीय रिफाइनर अब तेल के स्रोत को लेकर ज्यादा सावधान हो गए हैं। वे ऐसी खेपों से दूरी बना रहे हैं, जिनका सीधा संबंध प्रतिबंधित रूसी कंपनियों से हो सकता है। इसी वजह से कुछ बड़ी भारतीय कंपनियों ने फिलहाल रूस से तेल खरीदना रोक दिया है, जबकि कुछ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां और रूस समर्थित इकाइयां अब भी सीमित मात्रा में खरीद जारी रखे हुए हैं।

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