नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के व्यावसायिक वाहनों को 13 निजी एटीएस से जोड़ा गया है। वाहन मालिक जब ऑनलाइन फिटनेस के लिए स्लॉट बुक कर रहे हैं, तो उन्हें सिस्टम के जरिए नजदीकी एटीएस ही आवंटित किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता तो बढ़ी है, लेकिन कई जिलों के वाहन चालकों के लिए दूरी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
केंद्र सरकार के निर्देश पर लागू हुआ बदलाव
दरअसल, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (परिवहन) को पत्र भेजकर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वाहन फिटनेस अब केवल ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर पर ही कराई जाए। इसके बाद 17 नवंबर को राज्य स्तर पर आदेश जारी कर दिए गए थे कि 1 जनवरी से एटीएस के माध्यम से फिटनेस अनिवार्य होगी। सोमवार से इस आदेश का पूरी तरह पालन शुरू कर दिया गया है।
अब प्रदेश में कहीं भी मैनुअल फिटनेस जांच नहीं हो रही है। फिटनेस के लिए आवेदन करने वाले वाहन मालिकों को सीधे नजदीकी एटीएस का स्लॉट दिया जा रहा है। प्रत्येक एटीएस को लगभग 100 किलोमीटर के दायरे से जोड़ा गया है, जबकि पहले अधिकांश जिलों में स्थानीय स्तर पर ही मैनुअल फिटनेस की सुविधा उपलब्ध थी।
फिटनेस नहीं कराने पर भारी जुर्माना
नियमों के अनुसार, नए व्यावसायिक वाहनों को पंजीकरण के बाद आठ साल तक हर दो साल में और उसके बाद हर साल फिटनेस कराना अनिवार्य है। यदि वाहन बिना फिटनेस के पकड़ा जाता है तो पहली बार 5,000 रुपये और दूसरी बार 10,000 रुपये का चालान लगाया जाएगा। ऐसे में समय पर फिटनेस कराना अब और भी जरूरी हो गया है।
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