खुशखबरी! मेक इन इंडिया के 12 साल में बदली भारत की तस्वीर, दुनिया की नजर

नई दिल्ली। मेक इन इंडिया अभियान को शुरू हुए 12 साल पूरे हो गए हैं। 25 सितंबर 2014 को शुरू हुई इस पहल के बाद भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, डिफेंस, स्टील और दूसरे क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2022-23 से 2025-26 के बीच मैन्युफैक्चरिंग GVA ने 10.88% की CAGR दर्ज की। वहीं अप्रैल-जुलाई 2026 में IIP के मैन्युफैक्चरिंग हिस्से में सालाना आधार पर 7% की वृद्धि दर्ज हुई।

इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में करीब 7 गुना बढ़ोतरी

मेक इन इंडिया की सबसे बड़ी तस्वीर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में दिखाई देती है। 2014-15 में करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन हुआ था, जो 2025-26 में बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी करीब सात गुना की बढ़ोतरी। इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात भी लगभग 38 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

मोबाइल निर्माण में 33 गुना उछाल

मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में भी बड़ा बदलाव आया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उत्पादन 2014-15 के करीब 18 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। मोबाइल फोन का निर्यात भी करीब 1,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

डिफेंस उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर

मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार रक्षा क्षेत्र में भी नजर आता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो 2013-14 के मुकाबले करीब चार गुना है। इसी अवधि में रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया।

आगे सेमीकंडक्टर और कंपोनेंट पर जोर

अब फोकस केवल तैयार सामान बनाने तक सीमित नहीं है। सरकार ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और औद्योगिक पार्कों के लिए भी नई योजनाएं शुरू की हैं। उदाहरण के लिए Semicon 2.0 के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये और 100 औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए 33,660 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

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