8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए गठन की तारीख से 18 महीने का समय दिया गया है। सरकार ने यह भी बताया है कि सामान्य परंपरा के अनुसार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का प्रभाव 1 जनवरी 2026 से अपेक्षित माना जा सकता है, लेकिन वास्तविक प्रभावी तारीख और भुगतान की प्रक्रिया अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।
देरी होने पर कैसे बन सकता है एरियर?
इसे आसान उदाहरण से समझें। मान लीजिए नई बेसिक पे किसी पिछली तारीख से लागू होती है, लेकिन कर्मचारी को संशोधित वेतन कुछ महीने बाद मिलना शुरू होता है। ऐसी स्थिति में प्रभावी तारीख से वास्तविक भुगतान के बीच का अंतर एरियर के रूप में बन सकता है। एरियर की रकम मुख्य रूप से नई बेसिक पे, फिटमेंट फैक्टर और कितने महीनों का अंतर रहा, इन बातों पर निर्भर करेगी।
लेवल 6 में कितना हो सकता है?
उदाहरण के तौर पर अगर मौजूदा बेसिक पे ₹35,400 मानी जाए और केवल संभावित फिटमेंट फैक्टर के आधार पर गणना की जाए, तो अलग-अलग फैक्टर पर एरियर की रकम काफी बदल सकती है। 2.15 फिटमेंट फैक्टर पर संशोधित बेसिक करीब ₹76,110 होगी। इस आधार पर 20 महीने के अंतर की गणना लगभग ₹8.14 लाख और 24 महीने की करीब ₹9.77 लाख बैठ सकती है। वहीं 2.57 फिटमेंट फैक्टर पर यही अनुमान 20 महीने के लिए करीब ₹11.12 लाख और 24 महीने के लिए करीब ₹13.34 लाख तक पहुंच सकता है।
ये आंकड़े अंतिम नहीं हैं
यहां ध्यान रखना जरूरी है कि ऊपर दिए गए आंकड़े सिर्फ अनुमानित गणना हैं। इनमें वास्तविक एरियर की तरह सभी भत्तों और अन्य वेतन घटकों को शामिल नहीं किया गया है। HRA, DA और दूसरे भत्तों की गणना अलग नियमों के अनुसार हो सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 8वें वेतन आयोग ने अभी अंतिम फिटमेंट फैक्टर और नई सैलरी स्ट्रक्चर तय नहीं की है। इसलिए आंकड़ों को संभावित उदाहरण के तौर पर ही देखना चाहिए, अंतिम भुगतान के तौर पर नहीं। कर्मचारियों के लिए वास्तविक एरियर का हिसाब तभी स्पष्ट होगा, जब आयोग की सिफारिशों के बाद सरकार संशोधित वेतन, फिटमेंट फैक्टर और प्रभावी तारीख को लेकर अंतिम निर्णय करेगी।

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