योजना के शुरुआती चरण में 6 विमान रूस से भारत लाए जाएंगे। इसके बाद देश में इन विमानों की असेंबली शुरू करने के लिए उत्पादन लाइन विकसित करने और तकनीक को भारत लाने पर काम किया जाएगा। कंपनी ने इस परियोजना के पहले चरण में करीब 1,500 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बताई है। भविष्य में परियोजना का विस्तार होने पर निवेश बढ़ सकता है।
छोटे शहरों के लिए उपयोगी हो सकता है विमान
IL-114-300 एक ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप विमान है, जिसमें करीब 66 से 68 यात्रियों के बैठने की क्षमता बताई जाती है। इसे क्षेत्रीय उड़ानों और अपेक्षाकृत छोटे रनवे वाले एयरपोर्ट के लिए डिजाइन किया गया है। भारत में क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने की कोशिशों के बीच ऐसे विमान छोटे शहरों को आपस में जोड़ने में उपयोगी हो सकते हैं। इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों के बीच सीधी उड़ानों की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
धीरे-धीरे बढ़ेगा घरेलू निर्माण
इस परियोजना में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को अहम हिस्सा माना जा रहा है। शुरुआत में तैयार विमान भारत आएंगे, फिर असेंबली का काम शुरू करने और धीरे-धीरे ज्यादा पुर्जों का निर्माण देश में करने की योजना है। कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य विमान के 100 फीसदी घरेलू निर्माण तक पहुंचना बताया गया है।
अगर योजना आगे बढ़ती है तो विमान निर्माण के साथ पार्ट्स, इंजीनियरिंग, रखरखाव और एविएशन सेवाओं से जुड़े कारोबार को भी नए अवसर मिल सकते हैं। केंद्र की ओर से भी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए ऐसे विमानों की उपयोगिता पर जोर दिया गया है।

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