बैठक में किसानों ने मुआवजा तय करते समय इलाके के सबसे अधिक सर्किल रेट को आधार बनाने की मांग रखी। साथ ही एक्सप्रेसवे से खेतों और गांवों तक पहुंच प्रभावित न हो, इसके लिए सर्विस रोड, अंडरपास और सिंचाई व्यवस्था बनाए रखने की मांग भी उठाई गई।
आपको बता दें की इस परियोजना के लिए चुनार क्षेत्र के करीब 36 गांवों की जमीन प्रस्तावित अधिग्रहण में शामिल है। प्रशासन के मुताबिक जमीन की कीमत उसकी श्रेणी और प्रकृति के आधार पर तय की जाएगी।
हालांकि, एक्सप्रेसवे को लेकर सभी किसान एकमत नहीं हैं। भारतीय किसान यूनियन और जन संघर्ष समिति की ओर से परियोजना के विरोध में 3000 से ज्यादा किसानों के हस्ताक्षर वाला ज्ञापन सौंपा गया। विरोध कर रहे किसानों ने उपजाऊ कृषि भूमि और पर्यावरण पर संभावित असर का मुद्दा उठाया है।
प्रशासन ने किसानों की मांगों और आपत्तियों को संबंधित स्तर पर जांच कराने की बात कही है। ऐसे में अब मुआवजे की दर और किसानों की अन्य मांगों पर होने वाली अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

0 comments:
Post a Comment