रेलवे बोर्ड ने इस बार क्वार्टर के प्रकार के साथ उसके प्लिंथ एरिया यानी क्षेत्रफल को भी किराया तय करने का आधार बनाया है। अलग-अलग श्रेणी के आवासों में लाइसेंस शुल्क में 10 रुपये से लेकर 630 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका सीधा असर रेलवे कर्मचारियों की सैलरी से होने वाली आवास शुल्क की मासिक कटौती पर पड़ेगा।
तीन साल बाद बदली गईं दरें
सरकारी आवासों के लाइसेंस शुल्क में पिछला संशोधन 1 जुलाई 2023 को किया गया था। अब रेलवे बोर्ड ने नई दरें जारी की हैं। हालांकि, सब-स्टैंडर्ड क्वार्टरों पर संशोधित दरें लागू नहीं होंगी।
टाइप-1 और टाइप-2 क्वार्टर का किराया
टाइप-1 क्वार्टर के लिए क्षेत्रफल के हिसाब से नया मासिक शुल्क 130 से 220 रुपये तक रखा गया है। वहीं, टाइप-2 आवासों के लिए यह शुल्क 280 से 380 रुपये तक होगा। यानी क्वार्टर का क्षेत्रफल जितना अधिक होगा, उसके हिसाब से लाइसेंस शुल्क भी बढ़ेगा।
टाइप-3 क्वार्टरों में भी किराए में बदलाव किया गया है। 60 वर्ग मीटर तक के आवास के लिए 470 रुपये मासिक शुल्क तय किया गया है। 60 से 65 वर्ग मीटर के लिए 530 रुपये, 65 से 70 वर्ग मीटर के लिए 570 रुपये और 70 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले क्वार्टर के लिए 610 रुपये मासिक लाइसेंस शुल्क देना होगा।
नई दरों के लागू होने के बाद रेलवे कॉलोनियों में रहने वाले कर्मचारियों की सैलरी से आवास के लिए पहले की तुलना में कुछ अधिक राशि कटेगी।
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