रूस में हुई अहम टेस्टिंग
कावेरी डेरिवेटिव इंजन को रूस के CIAM और ग्रोमोव फ्लाइट रिसर्च इंस्टीट्यूट में अलग-अलग परिस्थितियों में परखा गया। हाई-एल्टीट्यूड टेस्ट में कम तापमान और कम वायुदाब जैसी स्थितियों में इंजन की क्षमता जांची गई। इसके बाद इसे एक संशोधित Il-76 फ्लाइंग टेस्टबेड पर लगाया गया। हवा में उड़ान के दौरान अलग-अलग परिस्थितियों में इंजन के थ्रस्ट और प्रदर्शन का परीक्षण किया गया।
घातक UCAV के लिए अहम कदम
कावेरी का यह ड्राई वर्जन खास तौर पर ऐसे प्लेटफॉर्म के लिए विकसित किया जा रहा है, जिन्हें आफ्टरबर्नर की अतिरिक्त ताकत की जरूरत नहीं होती। इसका संभावित इस्तेमाल भारत के स्वदेशी ‘घातक’ UCAV में किया जाना है।
हालांकि, टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन का मतलब यह नहीं है कि इंजन अभी सीधे ऑपरेशनल इस्तेमाल के लिए तैयार हो गया है। आगे सर्टिफिकेशन और प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। CEMILAC टेस्ट डेटा और जरूरी मानकों की जांच के बाद एयरवर्दीनेस मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
दशकों पुराने प्रोजेक्ट को मिली नई दिशा
कावेरी इंजन का सफर काफी पुराना है। इसे मूल रूप से तेजस जैसे हल्के लड़ाकू विमान के लिए विकसित किया गया था, लेकिन शुरुआती दौर में जरूरी थ्रस्ट हासिल करने समेत कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं। इसके चलते मूल कावेरी इंजन तेजस में इस्तेमाल नहीं हो सका।
इसके बावजूद इस प्रोजेक्ट से भारत को गैस टर्बाइन और जेट इंजन तकनीक में महत्वपूर्ण अनुभव मिला। अब कावेरी के डेरिवेटिव वर्जन की टेस्टिंग में मिली यह सफलता स्वदेशी सैन्य विमानन तकनीक के लिए एक अहम अगला कदम मानी जा रही है।
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