करीब 12 साल बाद EPFO की अनिवार्य कवरेज सीमा में बदलाव किया गया है। इससे अब 15,000 से 25,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी तय नियमों के तहत EPFO के दायरे में आएंगे। सरकार के मुताबिक, निजी क्षेत्र में कर्मचारियों की औसत मासिक आय में बढ़ोतरी को देखते हुए वेतन सीमा को संशोधित किया गया है।
EPF के साथ पेंशन और बीमा का लाभ
नई सीमा के दायरे में आने वाले पात्र कर्मचारियों को EPFO से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का फायदा मिलेगा। इसमें EPF, EPS और EDLI प्रमुख हैं। EPF के जरिए रिटायरमेंट के लिए बचत होती है, जबकि EPS के तहत पात्र कर्मचारियों को पेंशन और EDLI के तहत बीमा कवर मिलता है।
सरकार पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ
EPFO का दायरा बढ़ने से सरकार की वित्तीय जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। अनुमान के मुताबिक, इस फैसले के बाद सालाना खर्च करीब 11,339 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। पांच साल में सरकार की अनुमानित वित्तीय प्रतिबद्धता करीब 56,696 करोड़ रुपये रहने की बात कही गई है।
वर्तमान में EPFO से करीब 7.98 करोड़ योगदान करने वाले सदस्य जुड़े हैं। नई व्यवस्था के बाद बड़ी संख्या में कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क से जुड़ने का रास्ता साफ होगा। हालांकि, वेतन सीमा बढ़ाने के फैसले पर ट्रेड यूनियनों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ संगठनों ने इसे लंबे समय से लंबित मांग बताते हुए कहा है कि नई सीमा को और बढ़ाने की जरूरत है।

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