रोहतास में सबसे बड़ा खजाना
नई खोजों में रोहतास का हिस्सा काफी बड़ा है। यहां पिपराडीह-भुरवा और चुटिया-नौहट्टा क्षेत्र में करीब 13.01 करोड़ टन ग्लॉकोनाइट मिला है, जिसकी अनुमानित कीमत 14,048 करोड़ रुपये बताई गई है। इससे पोटाश आधारित उर्वरक तैयार करने की संभावनाएं हैं। इसके अलावा भोरा-कथरा क्षेत्र में करीब 3.3 से 3.97 करोड़ टन उच्च गुणवत्ता वाला चूना पत्थर भी मिला है। रोहतास का अमझोर क्षेत्र पाइराइट के लिए भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार यहां देश के ज्ञात पाइराइट संसाधनों का करीब 95 फीसदी हिस्सा बताया गया है।
जमुई में मैग्नेटाइट और सोने की संभावना
जमुई के मजोस ब्लॉक में करीब 4.84 करोड़ टन मैग्नेटाइट का आकलन किया गया है। इसकी अनुमानित कीमत 3,817 करोड़ से 6,000 करोड़ रुपये के बीच बताई गई है। भंटा ब्लॉक में भी करीब 64.9 लाख टन मैग्नेटाइट की पहचान हुई है। वहीं, सोनो क्षेत्र में करीब 22.29 करोड़ टन सोना-युक्त अयस्क की पहचान की गई है, जिसमें लगभग 37.6 टन सोना होने का अनुमान है। यहां 2027-28 में ट्रायल प्रोडक्शन का लक्ष्य बताया गया है।
गया और जहानाबाद में भी अहम खनिज
गया और जहानाबाद के कुछ क्षेत्रों में वैनेडियम युक्त मैग्नेटाइट, इल्मेनाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और लिथियम युक्त पेग्माटाइट की मौजूदगी सामने आई है। इनका इस्तेमाल स्टील, ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइन और रक्षा क्षेत्र जैसी तकनीकों में होता है।
खदान शुरू होने में अभी लगेगा समय
खनिज मिलने का मतलब यह नहीं है कि तुरंत खनन शुरू हो जाएगा। इसके लिए आगे की खोज, ब्लॉकों की नीलामी, पर्यावरणीय मंजूरी और माइनिंग लीज जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। राज्य ने 2026 से 2031 के बीच अलग-अलग परियोजनाओं को व्यावसायिक खनन की दिशा में आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में इन खोजों का वास्तविक आर्थिक लाभ खदानों के संचालन में आने के बाद ही सामने आएगा।
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