6 फीसदी सालाना इंक्रीमेंट की मांग
दोनों संगठनों ने मौजूदा 3 फीसदी सालाना इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6 फीसदी करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा वेतन मैट्रिक्स में बदलाव और न्यूनतम वेतन तय करने के तरीके में भी संशोधन की मांग सामने आई है। BPMS ने वेतन निर्धारण में प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि और परिवार की जरूरतों को भी ध्यान में रखने का प्रस्ताव दिया है।
₹72 हजार बेसिक पे कैसे बन सकती है?
फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल मौजूदा बेसिक पे को संशोधित करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के तौर पर 7वें वेतन आयोग में Level-1 की न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये है। यदि 4 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो गणना के अनुसार 18,000 × 4 = 72,000 रुपये बेसिक पे बनती है।
इन-हैंड सैलरी इतनी सीधे नहीं बढ़ेगी
यह समझना जरूरी है कि फिटमेंट फैक्टर को मौजूदा बेसिक पे पर लागू करने से बनने वाली रकम ही कर्मचारी की अंतिम सैलरी नहीं होगी। वास्तविक इन-हैंड वेतन नई बेसिक पे के साथ HRA, ट्रांसपोर्ट और अन्य भत्तों तथा NPS, टैक्स जैसी कटौतियों पर निर्भर करेगा। इसलिए अभी किसी कर्मचारी की अंतिम सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह तय नहीं कहा जा सकता।
अभी प्रस्ताव, अंतिम फैसला बाकी
8वें वेतन आयोग का काम कर्मचारियों के वेतन और अन्य सेवा शर्तों में बदलाव पर सिफारिश देना है। केंद्र सरकार ने आयोग के लिए 18 महीने की समयसीमा तय की है। इसलिए ₹72,000 बेसिक पे या फिटमेंट फैक्टर 4 को फिलहाल कर्मचारी संगठन की मांग के तौर पर ही देखा जाना चाहिए; अंतिम वेतन संरचना आयोग की सिफारिश और सरकार के फैसले के बाद स्पष्ट होगी।

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