रूस ने इसके साथ ही अतिरिक्त स्थायी सीटों में पश्चिमी देशों की हिस्सेदारी बढ़ाने का विरोध किया। लावरोव ने खास तौर पर जर्मनी और जापान की दावेदारी पर आपत्ति जताई। रूस का कहना है कि सुरक्षा परिषद में सुधार ऐसा होना चाहिए जिससे दुनिया के उन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व बढ़े, जो मौजूदा व्यवस्था में अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व रखते हैं।
UNSC में भारत की दावेदारी क्या है?
वर्तमान में सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस पांच स्थायी सदस्य हैं और इनके पास वीटो अधिकार है। बाकी 10 सदस्य अस्थायी होते हैं और उनका कार्यकाल दो वर्ष का होता है।
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए सुधार की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि मौजूदा परिषद की संरचना आज की वैश्विक राजनीतिक, आर्थिक और जनसंख्या संबंधी वास्तविकताओं को पूरी तरह नहीं दर्शाती।
रूस के समर्थन का महत्व
रूस पहले भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और भारत की स्थायी सदस्यता की मांग का समर्थन करता रहा है। इसी महीने क्रेमलिन ने भी कहा था कि सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों को शामिल किया जाना चाहिए, हालांकि रूस मौजूदा वीटो व्यवस्था को बनाए रखने के पक्ष में है।
हालांकि रूस का समर्थन अपने आप में भारत को स्थायी सीट नहीं दिलाता। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति और सुरक्षा परिषद सुधार की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

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