तबादला उपलब्ध रिक्त पदों और आपसी सहमति वाले पदों के आधार पर किया जाएगा। कर्मचारियों को अधिकतम तीन जिलों का विकल्प देने की सुविधा होगी, जबकि कम से कम एक जिले का विकल्प चुनना जरूरी होगा। संबंधित जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आवेदनों की पात्रता जांचकर आगे की कार्रवाई करेंगे।
इन कर्मचारियों को मिलेगी प्राथमिकता
नीति में कुछ विशेष परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है। इनमें दिव्यांग कर्मचारी, गंभीर बीमारी से प्रभावित कर्मचारी, आकांक्षी जिले या ब्लॉक में तैनात कर्मचारी और विधवा या तलाकशुदा महिला कर्मचारी शामिल हैं। नाबालिग बच्चों या आश्रित परिजनों की गंभीर बीमारी जैसे मामलों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। सरकारी सेवा, NHM या केंद्रीय सशस्त्र बलों में कार्यरत पति-पत्नी से जुड़े मामलों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
आपसी सहमति यानी म्यूचुअल तबादले के आवेदनों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि, कुल संविदाकर्मियों के अधिकतम 10 प्रतिशत का ही स्थानांतरण किया जा सकेगा। तीन साल की सेवा अवधि में 180 दिन या उससे अधिक अवैतनिक अवकाश लेने वाले कर्मचारी इस प्रक्रिया के लिए पात्र नहीं होंगे।
प्रबंधन इकाइयों के कर्मचारियों को भी लाभ
जिला और ब्लॉक स्तर की कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों के लिए भी तबादले का रास्ता खुला है। डीपीएम, डीसीपीएम, डीएएम, बीपीएम, बीसीपीएम और बीएएम जैसे पदों पर एक जिले में पांच साल से अधिक समय पूरा कर चुके कर्मचारियों को दूसरे जिले में स्थानांतरित किया जा सकेगा।
लंबे समय से तबादला नीति की मांग कर रहे NHM संविदाकर्मियों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे दूरदराज के जिलों में लंबे समय से तैनात कर्मचारियों को अपने गृह जिले या नजदीकी जिले में जाने का अवसर मिल सकेगा।
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