पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर! OROP लागू करने की मांग, पुराने-नए पेंशन में अंतर का मुद्दा

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग के सामने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े कई प्रस्ताव रखे जा रहे हैं। इसी कड़ी में पुराने और नए पेंशनर्स के बीच पेंशन की समानता का मुद्दा भी सामने आया है। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सिविल कर्मचारियों के लिए भी वन रैंक, वन पेंशन (OROP) जैसी व्यवस्था पर विचार किया जाए।

क्या है OROP की मांग?

OROP का मूल विचार यह है कि समान पद और समान सेवा से रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन में सिर्फ रिटायरमेंट की तारीख के कारण बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए। संगठनों का तर्क है कि अलग-अलग वेतन आयोगों के कारण एक ही पद से अलग समय पर रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन में अंतर पैदा हो सकता है। रक्षा पेंशनर्स के लिए OROP की व्यवस्था पहले से लागू है और रक्षा मंत्रालय इसके तहत पेंशन संशोधन संबंधी आदेश जारी करता रहा है।

सिविल कर्मचारियों का प्रस्ताव?

AIDEF और अन्य कर्मचारी संगठनों की ओर से 8वें वेतन आयोग के सामने पेंशन समानता से जुड़े सुझाव रखे गए हैं। एक प्रस्ताव में कहा गया है कि पेंशन तय करते समय रिटायरमेंट के समय का पद या लेवल, उस पद का वेतन, सेवा के दौरान मिली वेतन वृद्धि और प्रमोशन जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। संगठनों का यह भी कहना है कि रिटायरमेंट के बाद अगर संबंधित पद या लेवल अपग्रेड होता है, तो पुराने पेंशनर्स के मामले में भी उसका प्रभाव देखा जाना चाहिए।

पुराने पेंशनर्स का मुद्दा भी अहम

8वें वेतन आयोग के मौजूदा Terms of Reference में 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनर्स की पेंशन संशोधन को लेकर स्पष्ट प्रावधान का मुद्दा कर्मचारी संगठनों ने उठाया है। अगस्त 2026 में DoPT ने ऐसे प्रतिनिधित्वों को आगे की कार्रवाई के लिए Department of Expenditure को भेजा था।

अभी अंतिम फैसला नहीं

फिलहाल OROP को केंद्रीय सिविल कर्मचारियों पर लागू करने को लेकर कोई अंतिम सरकारी फैसला नहीं हुआ है। ये मांगें और सुझाव 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। पेंशन में वास्तविक बदलाव या समानता का स्वरूप आयोग की सिफारिशों और उसके बाद सरकार के फैसले से ही स्पष्ट होगा।

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