भारत पर बढ़ा अर्थशास्त्रियों का भरोसा
WEF के सर्वे में 98% मुख्य अर्थशास्त्रियों ने माना कि अगले 12 महीनों में भारत की आर्थिक वृद्धि औसत या उससे बेहतर रह सकती है। वहीं 74% विशेषज्ञों को मजबूत या बहुत मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है। मई में यह आंकड़ा 52% था। WEF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 6.7% रखा है। भारत की मजबूत घरेलू मांग को आर्थिक विकास का प्रमुख सहारा माना गया है। हालांकि, ऊंची ऊर्जा कीमतें और जियोपॉलिटिकल तनाव आगे चुनौती बन सकते हैं।
चीन और यूरोप का आउटलुक कमजोर
भारत के मुकाबले चीन की तस्वीर अलग है। WEF के मुताबिक करीब एक-तिहाई अर्थशास्त्रियों को चीन में कमजोर आर्थिक वृद्धि की आशंका है। यूरोप की स्थिति और कमजोर बताई गई है, जहां 61% विशेषज्ञों ने कमजोर या बहुत कमजोर ग्रोथ की संभावना जताई। अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य एशिया को लेकर भी अपेक्षाकृत मजबूत वृद्धि की उम्मीद जताई गई है।
वैश्विक जोखिम के बीच भारत को घरेलू मांग का सहारा
सर्वे में शामिल अर्थशास्त्रियों के मुताबिक अगले साल जियोपॉलिटिकल टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी अनिश्चितता रह सकते हैं। इसके बावजूद भारत की घरेलू मांग को मजबूत माना जा रहा है, जो बाहरी झटकों के असर को कुछ हद तक कम कर सकती है। यह आकलन भारत के अप्रैल-जून तिमाही के GDP आंकड़े जारी होने से पहले किया गया था। बाद में इस अवधि में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8% दर्ज की गई।

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