गोबर और कचरे से बनेगी CBG
GOBARdhan यानी ‘Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan’ के तहत पशुओं का गोबर, फसल अवशेष, रसोई का जैविक कचरा और अन्य बायो-वेस्ट इस्तेमाल किया जाएगा। इनसे बायोगैस, CBG और जैविक खाद तैयार करने की व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य घरेलू CBG उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है।
CBG की खरीद और कीमत का इंतजाम
योजना में CBG उत्पादकों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के जरिए CNG और घरेलू PNG में CBG की हिस्सेदारी बढ़ाई जाएगी। यह दायित्व 2026-27 में 3%, 2027-28 में 4% और 2028-29 से 5% रहेगा।
इसके अलावा CBG के लिए 2,110 रुपये प्रति MMBTU की प्रशासित कीमत तय की गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह लगभग 105 रुपये प्रति किलोग्राम CBG के बराबर है और कम से कम 10 साल की अवधि के लिए मूल्य संबंधी स्थिरता देने का लक्ष्य है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है फायदा
योजना में केवल गैस उत्पादन ही नहीं, बल्कि पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी, ऋण गारंटी और तकनीकी विकास जैसे प्रावधान भी शामिल हैं। इससे बायो-वेस्ट के बेहतर इस्तेमाल के साथ ग्रामीण इलाकों में नए व्यवसाय और रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
इस तरह GOBARdhan का उद्देश्य कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलकर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना और CBG क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है।
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