किन सेक्टरों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
अमेरिकी शुल्क बढ़ने के बाद जिन क्षेत्रों का निर्यात सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, उनमें लेदर और उससे बने उत्पाद, जेम्स व ज्वैलरी, रेडीमेड गारमेंट, इंजीनियरिंग गुड्स, हैंडीक्राफ्ट्स जैसे श्रम-प्रधान सेक्टर शामिल हैं। इन उद्योगों में लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है, ऐसे में निर्यात में गिरावट का सीधा असर नौकरियों पर भी पड़ने की आशंका है।
सितंबर से दिखने लगा था असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सितंबर से ही अमेरिका जाने वाले ऑर्डर कम होने लगे थे। इसके बाद से ही निर्यातक संगठन सरकार से अलग से इंसेंटिव, टैक्स में राहत या वित्तीय सहायता की मांग कर रहे थे। हालांकि, शुरुआत में सरकार ने इन सेक्टरों से नुकसान का आकलन करने को कहा था, ताकि उसी आधार पर कोई ठोस फैसला लिया जा सके।
बजट में मिल सकती है सीधी राहत
ऐसे हालात में सरकार अब उन सेक्टरों पर फोकस कर सकती है, जिनका निर्यात सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है या जिनके अमेरिकी ऑर्डर लगभग ठप हो चुके हैं। बजट में निर्यात प्रोत्साहन बढ़ाने, ब्याज सब्सिडी, टैक्स में राहत या उत्पादन से जुड़ी वित्तीय मदद जैसे उपायों की घोषणा संभव है।
रोजगार बचाने पर सरकार की नजर
कई निर्यातक ऐसे हैं, जिनका पूरा कारोबार अमेरिका के बाजार पर निर्भर है। इन इकाइयों में सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। अगर ऑर्डर घटते हैं, तो उत्पादन कम करना पड़ेगा और इसका सीधा असर नौकरियों पर पड़ेगा। सरकार नहीं चाहती कि वैश्विक व्यापार विवादों का बोझ देश के श्रमिकों पर पड़े।
साफ संकेत: भारत पीछे हटने वाला नहीं
सरकार यह संदेश देना चाहती है कि भारत अमेरिकी टैरिफ से डरकर पीछे नहीं हटेगा। बजट के जरिए न सिर्फ प्रभावित उद्योगों को संभालने की कोशिश होगी, बल्कि यह भी दिखाया जाएगा कि भारत अपनी आर्थिक और रोजगार नीति को वैश्विक दबावों के बावजूद मजबूती से आगे बढ़ाने में सक्षम है।

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