यह सिस्टम दुश्मन के रेडियो और डेटा लिंक को रोकने के साथ-साथ उसके सिग्नल का विश्लेषण भी कर सकता है। यानी यह सिर्फ जामिंग नहीं करता, बल्कि दुश्मन की गतिविधियों की जानकारी भी देता है। GBVU जैमर 30 मेगाहर्ट्ज से 1000 मेगाहर्ट्ज तक की फ्रीक्वेंसी रेंज में काम करता है और दुश्मन के कम्युनिकेशन सेंटर का पता लगाने में सक्षम है।
कैसे काम करता है यह जैमर
इस जैमर की सबसे बड़ी खासियत है कि यह दुश्मन के सिग्नल की दिशा और दूरी का पता लगा सकता है। इससे भारतीय वायुसेना जरूरत पड़ने पर सटीक कार्रवाई भी कर सकती है। BEL ने बताया कि इस सिस्टम पर काम 2010 में शुरू हुआ था और यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।
सीमा पर बढ़ेगा सुरक्षा कवच
GBVU जैमर संवेदनशील बॉर्डर इलाकों में तैनाती के लिए बेहद कारगर है। यह न केवल दुश्मन के संचार नेटवर्क को कमजोर करेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर आर्टिलरी, मिसाइल या ड्रोन यूनिट्स को सटीक जानकारी भी उपलब्ध कराएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर नेटवर्क को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
19840 करोड़ रुपये का बड़ा प्रोजेक्ट
इस जैमर सहित इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्लेटफॉर्म के लिए जून 2023 में BEL को लगभग 19840 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला। इसके तहत कई GBVU यूनिट्स बनाई जा रही हैं, जो सीमा क्षेत्रों में तैनात होकर दुश्मन के संचार को बाधित करेंगी और भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमता को और मजबूत करेंगी।
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