इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश में रासायनिक खादों के आयात को कम करना और किसानों को जैविक खाद जैसे विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना होगा।
खाद की बढ़ती खपत और बिक्री
देश में रासायनिक उर्वरकों की खपत लगातार बढ़ रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2024-25 में खाद की बिक्री 655.94 लाख टन तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह 600.79 लाख टन थी। यूरिया की बिक्री में 8.4% की बढ़ोतरी हुई, वहीं एमओपी और कॉम्प्लेक्स खाद की बिक्री में क्रमशः 33.9% और 28.2% की वृद्धि देखी गई। हालांकि, डीएपी की बिक्री में गिरावट आई, जिसका कारण पिछले साल नवंबर तक बाजार में इसकी कमी रही।
आयात घटाने पर रहेगा फोकस
नई योजना के तहत सरकार ने 5 से 10 साल का लंबी अवधि का लक्ष्य तय किया है। योजना के अनुसार, अगले 5 सालों में रासायनिक खाद के आयात में 20% और 10 सालों में 35% तक की कमी लाने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खाद की सालाना बिक्री में 6-7% की कमी लायी जाए, तो बढ़ती खपत को नियंत्रित किया जा सकता है।
प्राकृतिक खेती पर जोर
सरकार इस मिशन को सफल बनाने के लिए अपनी मौजूदा योजनाओं में बदलाव कर सकती है। इसमें पीएम-प्रणाम योजना को आत्मनिर्भर उर्वरक मिशन में शामिल करने की संभावना है। किसानों को जैविक खाद, जैसे कि बायो-फर्टिलाइजर, अपनाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन और इंसेंटिव दिए जा सकते हैं। इसके अलावा, प्राकृतिक खेती मिशन के लिए बजट आवंटन बढ़ाने की भी संभावना है, जिससे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम हो सके।

0 comments:
Post a Comment